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Uttarakhand Leopard Attack : उत्तराखंड में तेंदुए का कहर, एक महीने में दूसरी मौत – गांव में दहशत

Published on: December 9, 2025 6:50 PM
Uttarakhand Leopard Attack : उत्तराखंड में तेंदुए का कहर, एक महीने में दूसरी मौत - गांव में दहशत
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Uttarakhand Leopard Attack : उत्तराखंड के हिमालयी इलाकों में जंगली जानवरों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव ने स्थानीय समुदायों को मुश्किल में डाल दिया है। यहां के लोग रोजमर्रा की जिंदगी में डर के साए में जी रहे हैं, क्योंकि तेंदुए जैसे शिकारी जानवर कभी भी हमला कर सकते हैं। हाल ही में चंपावत जिले के बाराकोट क्षेत्र में एक दुखद घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया, जहां एक तेंदुए ने एक व्यक्ति की जान ले ली। यह घटना न सिर्फ परिवार के लिए सदमा है, बल्कि पूरे गांव में खौफ फैला रही है।

तेंदुए के हमले का ताजा हादसा

सर्दियों की ठंडी सुबह में, चंपावत के चुयरानी गांव के धरगड़ा इलाके में 45 साल के देव सिंह अधिकारी घर से बाहर निकले थे। वे रोज की तरह शौच के लिए जा रहे थे, लेकिन अचानक एक तेंदुए ने उन पर झपट्टा मार दिया। हमले में देव सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, और तेंदुआ उनके शव को करीब 30 मीटर ऊपर जंगल की तरफ घसीट ले गया। यह हादसा 9 दिसंबर को हुआ, जो मंगलवार का दिन था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक महीने में यह इलाके में तेंदुए के हमले से दूसरी मौत है, जिससे हर कोई सहमा हुआ है।

परिवार पर टूटा दुख का पहाड़

देव सिंह एक साधारण परिवार के मुखिया थे। वे जल संस्थान में पीटीसी के पद पर काम करते थे और साथ ही मजदूरी करके घर चलाते थे। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटे बेटे हैं, जिनकी उम्र 9 और 10 साल है। दिल दहला देने वाली बात यह है कि एक दिन पहले, सोमवार शाम को तेंदुए ने देव सिंह की पत्नी पर भी हमला करने की कोशिश की थी। सौभाग्य से वह बच गईं, लेकिन अब परिवार सदमे में है। गांव वाले बताते हैं कि ऐसे हमलों से बच्चों का बाहर खेलना तक मुश्किल हो गया है, और हर कोई शाम ढलते ही घरों में दुबक जाता है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की जड़ें

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष कोई नई बात नहीं है। यहां जंगलों का घटना, आबादी का बढ़ना और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों से जानवर इंसानी बस्तियों के करीब आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में तेंदुए के हमलों में वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, 2023-24 में उत्तराखंड में ऐसे 50 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें कई मौतें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए प्राकृतिक शिकार कम हो रहा है, जिससे वे इंसानों की तरफ मुड़ते हैं। ऐसे में, जंगलों की सुरक्षा और लोगों की जागरूकता दोनों जरूरी हैं।

प्रशासन की तत्परता और कार्रवाई

घटना की खबर मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जिसका नेतृत्व वन दरोगा प्रकाश गिरी गोस्वामी ने किया। उन्होंने इलाके की जांच की और आवश्यक कदम उठाए। चंपावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार खुद देव सिंह के घर गए, जहां उन्होंने परिवार से संवेदना जताई। डीएम ने वन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि तेंदुए को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास करें। अब इलाके में जगह-जगह पिंजरे लगाए जा रहे हैं, ट्रैप कैमरे इंस्टॉल हो रहे हैं, और ड्रोन की मदद से निगरानी बढ़ाई गई है। साथ ही, गश्ती दलों को और सक्रिय किया गया है।

स्थानीय मांगें और सुरक्षा उपाय

गांव के लोग अब तेंदुए को आदमखोर घोषित करने और उसे पकड़ने या मार गिराने की मांग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी डीएम से इस पर जल्द कार्रवाई की अपील की है। वन विभाग के एसडीओ सुनील कुमार ने बताया कि टीम पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अकेले बाहर न निकलें, खासकर सुबह-शाम के समय, और हमेशा समूह में रहें।

वन अधिनियम के तहत, मृतक के परिवार को मुआवजा दिया जाएगा, जो उनके लिए थोड़ी राहत हो सकती है। लेकिन असली समाधान तो संघर्ष को कम करने में है, जैसे जंगलों में जानवरों के लिए पानी और शिकार की व्यवस्था करना।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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