Uttarakhand : उत्तराखंड जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और चुनौतीपूर्ण भूगोल के लिए जाना जाता है, इन दिनों तेजी से विकास की राह पर अग्रसर है। केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी, जिसे अक्सर ‘डबल इंजन’ सरकार कहा जाता है, ने यहां की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठ रहा है।
इसी क्रम में, केंद्र सरकार ने राज्य को विशेष पूंजीगत सहायता योजना के तहत एक महत्वपूर्ण वित्तीय मदद प्रदान की है, जो विकास कार्यों को और तेज करेगी।
केंद्र सरकार का बड़ा सहयोग
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने हाल ही में उत्तराखंड को 2025-26 के लिए विशेष पूंजी निवेश सहायता योजना के अंतर्गत दूसरी किस्त के रूप में 249.56 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह राशि व्यय विभाग के माध्यम से राज्य को हस्तांतरित की गई है। इस योजना का उद्देश्य राज्यों को उनकी विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त फंडिंग उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार निवेश कर सकें।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहां सड़कें, पुल और बिजली जैसी सुविधाएं सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ी हैं, यह सहायता बेहद अहम साबित होगी। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी योजनाओं से राज्य में सड़कों की लंबाई में 20% से अधिक की वृद्धि हुई है, जो पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री का आभार और दृष्टिकोण
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सहायता के लिए केंद्र सरकार का दिल से शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने बताया कि यह फंडिंग राज्य की बुनियादी संरचना को और मजबूत बनाने में मदद करेगी। साथ ही, यह रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आर्थिक स्थिरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
धामी सरकार की प्राथमिकता हमेशा से ही समावेशी विकास रही है, जहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों को बराबर ध्यान दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य का यह तालमेल प्रदेश को नई दिशा दे रहा है, जिससे यहां की युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य मिल सकेगा।
फंड का उपयोग कैसे होगा
इस प्राप्त राशि को राज्य सरकार पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से विकास कार्यों में लगाएगी। मुख्य रूप से सड़कें, पुल, शहरों और गांवों की बुनियादी सुविधाएं, पीने का पानी, ऊर्जा उत्पादन और अन्य परियोजनाओं पर फोकस किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, उत्तराखंड में पेयजल योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो चुके हैं, और अब इस फंड से ऐसी परियोजनाओं को और विस्तार मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य है कि हर परियोजना गुणवत्ता के उच्च मानकों पर खरी उतरे, ताकि कोई देरी न हो और जनता को तत्काल फायदा पहुंचे। इससे न सिर्फ आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर नौकरियां भी बढ़ेंगी, जो बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे युवाओं के लिए राहत की बात है।
समग्र विकास की दिशा में कदम
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को कुल 847.49 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है, जो ऋण के रूप में दी गई है। इस तरह का समर्थन राज्य की विभिन्न योजनाओं को गति दे रहा है, जिससे संतुलित और सतत विकास सुनिश्चित हो रहा है। उत्तराखंड, जो 2000 में अलग राज्य बना था, अब अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग कर रहा है।
पर्यटन, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलाव से यहां की जीडीपी में सुधार देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सरकारी पहलें राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगी, और आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के विकसित राज्यों में शुमार होगा।















