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Uttarakhand : 1954 का वो कानून, जिसे सीएम धामी अब सख्ती से लागू करने की कर रहे तैयारी

उत्तराखंड सरकार कुंभ के मद्देनजर हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र को 'पवित्र सनातन नगरी' घोषित करने की तैयारी कर रही है। इस फैसले पर मुहर लगते ही हर की पैड़ी समेत 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

Published on: January 5, 2026 3:29 PM
Uttarakhand : 1954 का वो कानून, जिसे सीएम धामी अब सख्ती से लागू करने की कर रहे तैयारी
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HIGHLIGHTS

  • हरिद्वार और ऋषिकेश के संपूर्ण कुंभ क्षेत्र में लागू होंगे एकसमान धार्मिक नियम (बायलाज)।
  • कुंभ मेला प्राधिकरण के सर्वे में चिन्हित सभी 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित होगा।
  • यह प्रतिबंध करीब 120-150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 50 किमी नदी किनारे लागू होगा।
  • यह फैसला 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश सरकार के बीच हुए समझौते पर आधारित है।

Uttarakhand : उत्तराखंड सरकार आगामी महाकुंभ को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लेने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हरिद्वार और ऋषिकेश के नगर निगम क्षेत्र समेत पूरे कुंभ क्षेत्र को ‘पवित्र सनातन नगरी’ घोषित करने की तैयारी की जा रही है।

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इस व्यवस्था के लागू होते ही हर की पैड़ी सहित कुल 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर कड़ा प्रतिबंध लग जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

देश में पहली बार लागू होंगे ऐसे बायलाज

कुंभ मेला प्राधिकरण ने हाल ही में एक सर्वे पूरा किया है, जिसमें हरिद्वार में कुल 105 गंगा घाट सामने आए हैं। श्री गंगा सभा और संत समाज लंबे समय से मांग कर रहा था कि इन सभी घाटों पर नगर निगम के धार्मिक बायलाज समान रूप से लागू हों।

इसी मांग को देखते हुए सरकार ने कुंभ के दौरान पूरी तीर्थ नगरी में घाट-स्तर पर एकसमान व्यवस्था लागू करने का मन बनाया है। यह देश में पहली बार होगा जब किसी गंगा तीर्थ नगरी में इतने बड़े स्तर पर धार्मिक नियम कानूनी रूप से प्रभावी होंगे।

120 वर्ग किलोमीटर तक रहेगा प्रतिबंध का दायरा

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प्रस्तावित प्रतिबंध का दायरा काफी व्यापक होगा। हरिद्वार से ऋषिकेश तक गंगा नदी के किनारे लगभग 45 से 50 किलोमीटर का हिस्सा इसके अंतर्गत आएगा। कुल मिलाकर करीब 120 से 150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और मेला आयोजन स्थल पर यह नियम लागू होंगे। इस दायरे में गंगा किनारे के नगर निगम क्षेत्र, प्रमुख तीर्थ स्थल, मठ, मंदिर, आश्रम, धर्मशालाएं और अखाड़े भी शामिल रहेंगे, जहां गैर-सनातन व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

1916 के समझौते की तर्ज पर फैसला

इतिहास पर नजर डालें तो यह कदम पूरी तरह नया नहीं है। साल 1916 में भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय ने तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के साथ एक अहम समझौता किया था। इसका उद्देश्य गंगा की अविरल धारा और तीर्थ नगरी की पवित्रता को सुरक्षित रखना था। उस समझौते में भी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश और क्षेत्र में उनके स्थायी निवास पर रोक शामिल थी।

श्री गंगा सभा आज भी इन नियमों का पालन करवाती है। इसके तहत हरिद्वार-ऋषिकेश में गैर-हिंदू केवल अपने कार्यों के लिए आ सकते हैं और काम खत्म होने पर उन्हें लौटना होता है, वे यहां स्थायी रूप से बस नहीं सकते। अब सरकार इसे और सख्ती से लागू करने जा रही है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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