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Valley of Flowers Forest Fire : फूलों की घाटी के पास 4 दिन से धधक रहे जंगल, अब वायुसेना संभालेगी मोर्चा

विश्व धरोहर फूलों की घाटी से सटे जंगलों में लगी आग चार दिनों से बेकाबू है। खड़ी पहाड़ियों और गिरते पत्थरों के कारण वन विभाग की टीमें मौके पर नहीं पहुंच पा रही हैं। आग के विकराल रूप को देखते हुए प्रशासन ने अब इसे बुझाने के लिए भारतीय वायुसेना (Air Force) से मदद मांगी है।

Published on: January 13, 2026 4:35 PM
Valley of Flowers Forest Fire : फूलों की घाटी के पास 4 दिन से धधक रहे जंगल, अब वायुसेना संभालेगी मोर्चा
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HIGHLIGHTS

  • चमोली में फूलों की घाटी रेंज के भ्यूंडार पुलना में चार दिन से धधक रहे जंगल।
  • खड़ी चट्टानों और गिरते पत्थरों के कारण पैदल रास्ता हुआ बंद, टीमें बेबस।
  • सुबह तेज हवाओं के साथ और भड़क जाती है आग, चारों दिशाओं में फैलने का खतरा।
  • वन विभाग ने डीएम के जरिए आपदा प्रबंधन सचिव को भेजा पत्र, हेलीकॉप्टर की मांग।

चमोली : विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी (Valley of Flowers) से सटी भ्यूंडार और पुलना की पहाड़ियों में पिछले चार दिनों से लगी आग अब वन विभाग के नियंत्रण से बाहर हो गई है। गोविंद घाट के ठीक सामने वाले जंगलों में आग इतनी भीषण हो चुकी है कि अब इसे बुझाने के लिए वन विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं और तत्काल वायुसेना की मदद मांगी है।

खड़ी चट्टानें और गिरते पत्थर: ग्राउंड जीरो के हालात

चमोली जिले की इस रेंज में आग बुझाना लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है। रेंजर चेतन कांडपाल ने बताया कि जिन पहाड़ियों में आग लगी है, वहां की चट्टानें बेहद खड़ी और दुर्गम हैं। आग की तपिश से चट्टानें चटक रही हैं और लगातार पत्थर गिर रहे हैं। इस वजह से वन विभाग और एसडीआरएफ की ग्राउंड टीमों का मौके तक पहुंचना जानलेवा साबित हो सकता है।

मैदानी प्रयासों की विफलता का एक बड़ा कारण मौसम भी है। रेंजर के अनुसार, शाम को तापमान गिरने पर आग थोड़ी धीमी पड़ती है, लेकिन सुबह होते ही तेज धूप और हवाओं के चलते लपटें दोबारा विकराल हो जाती हैं।

अब वायुसेना ही आखिरी उम्मीद

डीएफओ एसके दुबे ने पुष्टि की है कि आग अब चारों दिशाओं में तेजी से फैल रही है। जमीनी रास्ते बंद होने और सीमित संसाधनों के चलते अब हवाई मदद ही एकमात्र विकल्प बचा है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने जिलाधिकारी चमोली के माध्यम से राज्य के आपदा प्रबंधन सचिव को एक पत्र भेजा है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हेलीकॉप्टर और वायुसेना के उपकरणों के बिना इस आग पर काबू पाना नामुमकिन है। प्रशासन अब सरकार की हरी झंडी और वायुसेना के रेस्क्यू का इंतजार कर रहा है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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