देहरादून : उत्तराखंड में मनरेगा अब नए रंग-रूप में नजर आएगा। केंद्र सरकार के वीबी-जी राम जी बिल 2025 के तहत अब ग्रामीणों को 100 नहीं, बल्कि 125 दिन का रोजगार मिलेगा। राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री गणेश जोशी ने सोमवार को देहरादून में प्रेस वार्ता कर इस नए बदलाव की जानकारी दी।
मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि संसद से पास हुआ यह नया विधेयक ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ है। उन्होंने पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1989 की जवाहर रोजगार योजना बाद में नरेगा और फिर 2009 में मनरेगा बनी थी। अब सरकार ने इसे संशोधित कर और ज्यादा प्रभावशाली बनाया है ताकि सीधा लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
नए और पुराने नियमों में सबसे बड़ा अंतर काम के दिनों का है। पहले जहां साल भर में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। सिर्फ दिन ही नहीं, काम का दायरा भी बढ़ा है। अब ग्राम पंचायतों में स्थायी संपत्ति बनाने, जल संरक्षण, ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर और खेती से जुड़ी गतिविधियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड को इसमें विशेष छूट मिली है। सचिव ग्राम्य विकास अनुराधा पाल ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के लिए फंडिंग का अनुपात 90:10 रखा गया है। यानी इस योजना का 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देगी और राज्य सरकार को केवल 10 फीसदी हिस्सा मिलाना होगा।
उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन को भी इससे जोड़ा गया है। अब वीबी-जी राम जी बिल के तहत गांवों में सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) बनाने और जंगल की आग (फॉरेस्ट फायर) रोकने जैसे काम भी कराए जा सकेंगे। यह कदम आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेहद अहम साबित होगा।
किसानों की समस्या को देखते हुए एक नया नियम भी लागू किया गया है। बुवाई और कटाई के समय अक्सर मजदूरों की कमी हो जाती है। इसलिए साल में 60 दिन ऐसे तय किए जाएंगे जब इस योजना के तहत कोई सरकारी काम नहीं होगा। इससे खेती के पीक सीजन में किसानों को आसानी से मजदूर मिल सकेंगे और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होगा।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में अभी 10.10 लाख जॉब कार्ड धारक परिवार हैं। इनमें से सक्रिय परिवारों की संख्या करीब 6.71 लाख है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के लिए 840 करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित है। अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि योजना में गड़बड़ी करने या नियम तोड़ने वालों पर 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।













