हरिद्वार/देहरादून : उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस विभाग ने शुक्रवार को एक और बड़ी नजीर पेश की है। हरिद्वार में तैनात जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) श्याम आर्या और उनके निजी सहायक गौरव शर्मा को विजिलेंस की टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया।
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राशन वितरण प्रणाली से जुड़े एक अहम पद पर बैठे अधिकारी की गिरफ्तारी से विभाग में हड़कंप मच गया है।
राशन डीलर की शिकायत पर बिछाया जाल
इस कार्रवाई की नींव तब पड़ी जब एक पीड़ित राशन डीलर ने विजिलेंस विभाग का दरवाजा खटखटाया। डीलर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका काम करने की एवज में रिश्वत की मांग की जा रही है।
शिकायत मिलते ही विजिलेंस ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की। आरोप सही पाए जाने पर विभाग ने शुक्रवार को एक ट्रैप टीम का गठन किया। योजना के मुताबिक, जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर ही दोनों को पकड़ लिया।
ऑफिस में पूछताछ और रिकॉर्ड की जांच

गिरफ्तारी के तुरंत बाद विजिलेंस टीम ने हरिद्वार के जिला पूर्ति कार्यालय को अपने कब्जे में ले लिया। मौके पर ही श्याम आर्या और उनके सहायक गौरव शर्मा से कड़ी पूछताछ की जा रही है।
टीम सिर्फ गिरफ्तारी तक ही नहीं रुकी है, बल्कि ऑफिस के पुराने रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।
‘जीरो टॉलरेंस’ पर सरकार का जोर
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा मानी जा रही है। सीएम धामी ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि प्रशासन में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कसना जरूरी है।
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विजिलेंस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को खुली छूट मिली हुई है, जिसके चलते पिछले कुछ समय में कई अधिकारी रंगे हाथों पकड़े गए हैं। सरकार ने जनता से भी अपील की है कि वे बिना डरे भ्रष्टाचार की सूचना दें, उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।



















