देहरादून, उत्तराखंड : नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद देहरादून में संचालित विक्रमों को 7+1 से बदलकर 6+1 सीटिंग कैटेगरी में लाने के लिए परिवहन विभाग ने संचालकों को निर्देश दिए हैं। विभाग ने इस पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है, जिसमें अब तक 79 विक्रमों को सीज किया गया है। इसके विरोध में विक्रम यूनियन ने सभी वाहनों का संचालन रोक दिया है और विभाग के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
विक्रम संचालकों का कहना है कि पहले परिवहन विभाग ने ही उन्हें 7+1 का परमिट प्रदान किया था। अब कोर्ट के आदेश पर विभाग इस बदलाव को उन पर थोप रहा है, जिससे उनका नुकसान हो रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में विक्रमों का संचालन बंद कर दिया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि
नैनीताल हाईकोर्ट ने विक्रमों में ओवरलोडिंग रोकने के लिए आदेश दिया है कि ये केवल 6+1 श्रेणी में चल सकते हैं। आगे की सीट केवल चालक के लिए रहेगी और उसके बगल में कोई यात्री नहीं बैठेगा। शहर में कुल 516 विक्रम आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं। पहले इनमें से आधे 7+1 श्रेणी में थे, लेकिन कोर्ट ने सभी को 6+1 में ही मानने का निर्देश दिया है।
फिटनेस जांच के लिए चालक की बाईं ओर के हिस्से को बंद करना अनिवार्य होगा। यदि आगे यात्री बैठा मिला तो 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगेगा। परमिट शर्तों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई होगी।
पुराना विवाद और वर्तमान स्थिति
साल 2019 में तत्कालीन आरटीओ सुधांशु गर्ग ने आगे की सीट हटवाकर लोहे की रॉड लगवाई थी। बाद में संचालकों ने इसे हटाकर फिर यात्री बैठाना शुरू कर दिया। वर्ष 2021 में परिवहन मुख्यालय ने सभी विक्रमों को 7+1 श्रेणी में मानने का आदेश जारी किया था, लेकिन सिटी बस यूनियन के विरोध पर हाईकोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया। अब कोर्ट के उस आदेश के अनुपालन में विभाग ने फिर 6+1 कैटेगरी लागू करने के निर्देश दिए हैं।
विक्रम यूनियन अध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से विक्रम चला रहे हैं और इससे शहर में सबसे सस्ती यात्रा सुविधा उपलब्ध है। विभाग का यह कदम उत्पीड़न जैसा है, जिसमें एक यात्री और राजस्व दोनों का नुकसान हो रहा है। यूनियन ने भी हाईकोर्ट में मामला दायर किया है, जिस पर 31 दिसंबर को फैसला आने की संभावना है। हड़ताल गुरुवार से शुरू हुई है और यह कब तक चलेगी, यह स्पष्ट नहीं है।













