देहरादून जिले के विकासनगर इलाके में यमुना नदी का किनारा हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां की खूबसूरत वादियां और बहती नदी पर्यटकों व स्थानीय लोगों को घूमने-फिरने के लिए खींचती हैं। लेकिन कभी-कभी प्रकृति का मिजाज बदलता है और छोटी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत बन जाती है।
क्या हुआ था घटना के दिन
14 दिसंबर 2025 को विकासनगर के कटापत्थर क्षेत्र में एक परिवार के पांच सदस्य यमुना नदी के पास घूमने पहुंचे। ये सभी स्थानीय निवासी थे और नदी किनारे अच्छी तस्वीरें लेने के इरादे से थोड़ा आगे निकल गए। अचानक नदी का पानी बढ़ने लगा। सर्दियों में भी ऊपरी इलाकों से पानी छोड़े जाने या मौसम की वजह से यमुना का बहाव तेज हो जाता है, जिससे बीच में बने छोटे-छोटे टापू चारों तरफ से पानी से घिर जाते हैं।
इन पांच लोगों को पता ही नहीं चला कि कब वे नदी के बीच एक ऐसे टापू पर फंस गए, जहां से निकलना मुश्किल हो गया। चारों ओर तेज बहाव वाला पानी और कोई रास्ता नहीं। स्थिति गंभीर थी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
कोतवाली विकासनगर के कंट्रोल रूम में जैसे ही इसकी सूचना पहुंची, पुलिस टीम फौरन हरकत में आ गई। चौकी प्रभारी डाकपत्थर अपनी टीम के साथ, एसडीआरएफ और जल पुलिस की मदद लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया।
सावधानी से रस्सियां और जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए टीम ने सभी पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कोई चोट नहीं आई और सभी सकुशल अपने घर लौट गए।
बचाए गए लोग एक ही परिवार से थे – तीन युवतियां और दो किशोर-किशोरी समेत एक महिला। ये सभी लाइन जीवनगढ़ इलाके के रहने वाले हैं।
यमुना नदी के किनारे सावधानी क्यों जरूरी
उत्तराखंड में यमुना नदी का ऊपरी हिस्सा बेहद खूबसूरत है, लेकिन यहां पानी का स्तर कभी भी अचानक बढ़ सकता है। खासकर सर्दियों में बांधों से पानी छोड़े जाने या हल्की बारिश से बहाव तेज हो जाता है। कटापत्थर जैसे जगहों पर पिकनिक या फोटोग्राफी के लिए जाना आम है, लेकिन नदी में ज्यादा आगे जाना खतरनाक साबित हो सकता है।
ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जहां लोग टापू पर फंस गए या बहाव में आए। इसलिए हमेशा मौसम की जानकारी लें, नदी के बहुत करीब न जाएं और अगर पानी बढ़ता दिखे तो तुरंत सुरक्षित जगह पर लौट आएं। बच्चों और परिवार के साथ जाते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें।
देहरादून पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि मुसीबत के समय वे लोगों के सबसे बड़े सहारा बनकर उभरती हैं। ऐसी टीमों की बदौलत कई जिंदगियां सुरक्षित हो रही हैं।













