उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक दुखद घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है। यहां एक नशा मुक्ति केंद्र पर गंभीर आरोप लगे हैं, जहां इलाज के दौरान एक युवक की जान चली गई। परिवार का कहना है कि केंद्र के प्रबंधन की ढिलाई ने इस हादसे को जन्म दिया। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है, ताकि सच्चाई सामने आए।
नशे की लत से जूझते युवक की कहानी
नीरज नाम का यह 32 वर्षीय युवक तपोवन इलाके का रहने वाला था। उसके परिवार ने उसे नशे की बुरी आदत से छुटकारा दिलाने के लिए कई महीनों पहले रांझावाला स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल कराया था। ऐसे केंद्र अक्सर उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनते हैं जो नशे के जाल में फंस चुके होते हैं।
भारत में नशे की समस्या काफी गंभीर है—राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, हर साल लाखों युवा नशे की चपेट में आते हैं, और उत्तराखंड जैसे राज्यों में यह संख्या बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नशा मुक्ति केंद्रों में सही देखभाल और समय पर चिकित्सा मदद से 60-70% मरीज ठीक हो सकते हैं, लेकिन लापरवाही से स्थिति बिगड़ सकती है।
क्या हुआ उस दिन?
14 दिसंबर को अचानक नीरज की तबीयत बिगड़ी। केंद्र के कर्मचारियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के बीच ही उसकी मौत हो गई। परिवार के सदस्यों का दावा है कि अगर शुरुआत में ही सही मेडिकल सुविधा दी जाती, तो शायद यह नौबत नहीं आती। नीरज की बहन रोशनी देवी ने इस संबंध में रायपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने केंद्र के संचालकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की सुरक्षा कितनी जरूरी है, क्योंकि यहां आने वाले लोग पहले से ही कमजोर होते हैं।
पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई
रायपुर थाने के प्रभारी गिरीश नेगी ने बताया कि मौत की खबर मिलते ही पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। डॉक्टरों ने मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं किया, इसलिए विसरा को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। पुलिस टीम केंद्र पहुंची और वहां के स्टाफ से पूछताछ की। साथ ही, घटना के वक्त की सच्चाई जानने के लिए सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर को जब्त कर लिया गया है। जांच जारी है, और अगर लापरवाही साबित हुई तो दोषियों पर सख्त ऐक्शन लिया जाएगा।
यह मामला नशा मुक्ति केंद्रों की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है। उत्तराखंड में ऐसे सैकड़ों केंद्र चल रहे हैं, लेकिन कई में सुविधाओं की कमी या प्रशिक्षित स्टाफ की अनुपस्थिति की शिकायतें आती रहती हैं।
सरकार ने हाल ही में इन केंद्रों के लिए सख्त नियम बनाए हैं, जैसे 24 घंटे मेडिकल सपोर्ट और सीसीटीवी की अनिवार्यता, लेकिन अमल कितना हो रहा है, यह जांच का विषय है। अगर आप या आपके जानने वाले नशे से प्रभावित हैं, तो प्रमाणित केंद्र चुनें और परिवार का साथ जरूर लें—यह सफर अकेले नहीं जीता जा सकता।















