Menstrual Hygiene And Cervical Cancer : माहवारी के दिनों में साफ-सफाई का ध्यान रखना केवल आराम का मामला नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सेहत से सीधा जुड़ा हुआ है।
अक्सर यह सवाल सामने आता है कि क्या पीरियड्स में गंदा या पुराना कपड़ा इस्तेमाल करने से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है?
सीधा जवाब है—गंदा कपड़ा सीधे तौर पर कैंसर पैदा नहीं करता, लेकिन यह शरीर को ऐसे संक्रमणों की ओर धकेलता है जो आगे चलकर बड़ी बीमारी का रास्ता खोल सकते हैं।
क्या कहता है विज्ञान?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर के 99 प्रतिशत मामलों की मुख्य वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) होता है। यह एक वायरस संक्रमण है।
जब पीरियड्स में साफ-सफाई नहीं रखी जाती, तो प्राइवेट पार्ट में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। इससे रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इन्फेक्शन (RTI) का जोखिम लगभग दोगुना बढ़ जाता है।
बार-बार या लंबे समय तक रहने वाले इन इन्फेक्शन से सर्विक्स में सूजन आ जाती है, जिससे वहां की इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है। ऐसे कमजोर माहौल में HPV वायरस आसानी से पैर पसार लेता है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
कपड़े का इस्तेमाल करते समय होने वाली आम गलतियां
गांवों और छोटे शहरों में ही नहीं, कई बार शहरों में भी महिलाएं कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। कपड़ा इस्तेमाल करना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी आदतें नुकसानदेह हो जाती हैं:
धूप में न सुखाना: झिझक या शर्म के कारण महिलाएं धोए गए कपड़े को घर के अंदर या अंधेरे कोने में सुखाती हैं, जिससे उसमें बैक्टीरिया खत्म नहीं होते।
लंबे समय तक बदलना नहीं: एक ही कपड़े या पैड को 6-8 घंटे से ज्यादा समय तक लगाए रखना।
पुराना कपड़ा बार-बार इस्तेमाल करना: महीनों तक एक ही कपड़े का इस्तेमाल करते रहना।
सुरक्षित रहने के लिए जरूरी कदम
अगर आप पीरियड्स के दौरान कपड़ा इस्तेमाल करती हैं, तो इन बातों को अपनी आदत में जरूर शामिल करें:
- इस्तेमाल किए गए कपड़े को हर बार गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं।
- कपड़े को सीधी तेज धूप में सुखाएं, क्योंकि धूप प्राकृतिक डिसइन्फेक्टेंट का काम करती है।
- पैड हो या कपड़ा, उसे हर 4 से 6 घंटे में जरूर बदलें।
- प्राइवेट पार्ट की सफाई के लिए केवल सादे और साफ पानी का इस्तेमाल करें।
बचाव के आसान तरीके
सर्वाइकल कैंसर उन चुनिंदा बीमारियों में से है, जिनसे सही समय पर बचाव मुमकिन है। इसके लिए दो चीजें सबसे ज्यादा असरदार हैं:
HPV वैक्सीनेशन: 9 से 14 वर्ष की उम्र में लड़कियों को HPV का टीका लगवाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। हालांकि, डॉक्टर की सलाह पर इसे बाद में भी लगवाया जा सकता है।
रेगुलर स्क्रीनिंग: 30 वर्ष की उम्र के बाद हर महिला को डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर पैप स्मियर (Pap Smear) जांच जरूर करानी चाहिए। इससे किसी भी बदलाव को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता है।
माहवारी से जुड़ी शर्म को छोड़कर सही जानकारी अपनाना और दूसरों तक पहुंचाना ही सेहतमंद रहने का सबसे सुरक्षित रास्ता है।










