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NEET प्रदर्शनकारी Abhijit Dipke का BJP से सवाल, क्या आपके नेता अपनी असली डिग्री दिखाएंगे

NEET-UG पेपर लीक आंदोलन का चेहरा रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी विदेश पढ़ाई पर उठे सवालों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने अपनी स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के दस्तावेज सार्वजनिक करने की चुनौती देते हुए बीजेपी नेताओं से उनकी असली डिग्री दिखाने की मांग की है।

NEET protester Abhijit Dipke asks BJP if their leaders will show real degrees

HIGHLIGHTS

  • अभिजीत दीपके ने स्कॉलरशिप और लोन लेटर दिखाने की चुनौती दी।
  • सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता ने दीपके के पिता की जांच मांगी।
  • बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में एमएस हैं अभिजीत दीपके।
  • नीट अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए 1 करोड़ मुआवजे की मांग।

नई दिल्ली, 3 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)। 

NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijit Dipke) की विदेश में हुई पढ़ाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। अपने शैक्षणिक खर्चों पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) दाखिल किए जाने के बाद दीपके ने सीधा मोर्चा खोल दिया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी पढ़ाई का एक-एक हिसाब देने को तैयार हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं की शैक्षणिक योग्यताओं पर सीधा वार कर दिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो बयान जारी करते हुए अभिजीत दीपके ने सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक भाजपा कार्यकर्ता ने उनकी पढ़ाई के खर्च की जानकारी निकालने के लिए आरटीआई लगाई है। दीपके ने सवाल दागा कि एक सामान्य परिवार के लड़के का बोस्टन यूनिवर्सिटी जाकर पढ़ाई करना सत्तापक्ष को इतना क्यों खटक रहा है।

वे अपनी स्कॉलरशिप और बैंक लोन के सभी कागजात तुरंत सामने रखने के लिए तैयार हैं, बशर्ते भाजपा नेता भी सार्वजनिक रूप से अपनी असली डिग्रियां दिखाने की हिम्मत जुटाएं।

विवाद की शुरुआत गुजरात के सूरत से हुई। सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने शनिवार को अभिजीत के पिता के वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच कराने की मांग रखी। अभिजीत के पिता एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि एक पूर्व सरकारी सेवक के वेतन से बेटे को अमेरिका के नामचीन संस्थान में पढ़ाने का खर्च कैसे उठाया गया, इसकी बारीकी से पड़ताल होनी चाहिए।

अपनी पढ़ाई का पूरा विवरण देते हुए अभिजीत दीपके ने पूर्व में दी गई अपनी प्रतिक्रिया में पूरे मामले को पारदर्शी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोस्टन यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर ऑफ साइंस की पढ़ाई के लिए उन्हें यूनिवर्सिटी से मेरिट स्कॉलरशिप मिली थी। बाकी का बचा हुआ खर्च उठाने के लिए उन्होंने एक एजुकेशन लोन लिया था, जिसकी किश्तें वे आज भी चुका रहे हैं और यह कर्ज अभी बकाया है।

जून 2026 में अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए थे। उन्होंने देश भर के युवाओं को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकजुट करके NEET-UG परीक्षा में धांधली के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की। इस आंदोलन के दौरान उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधारों की मांग की थी।

दीपके ने केंद्र सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के कारण तनाव में आकर जान गंवाने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिजनों को सरकार ने अभी तक 1 करोड़ रुपये का मुआवजा नहीं दिया है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि इस तरह के मुआवजे के लिए नियमों और मानकों की जांच की जा रही है।

मुआवजे के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए अभिजीत ने सीधा आरोप लगाया कि विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त के वक्त सरकार के पास नियमों का कोई अड़ंगा नहीं होता और अरबों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं। पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देने की बारी आते ही फाइलें नियमों के जाल में उलझा दी जाती हैं। यह दिखाता है कि सरकार की नीयत में खोट है और अगर मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता नहीं दी गई तो देश भर के युवा दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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