ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

अरुणाचल प्रदेश के CM पेमा खांडू की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजनों से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की जांच CBI को सौंप दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 2015 से 2025 के बीच आवंटित हुए 1270 करोड़ रुपये के टेंडर्स की गहन पड़ताल की जाएगी।

अरुणाचल प्रदेश के CM पेमा खांडू की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश

HIGHLIGHTS

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसी को 2 सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज करने का निर्देश दिया है।
  • जांच का दायरा 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक के सभी सार्वजनिक कार्यों और वर्क ऑर्डर्स तक फैला होगा।
  • याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सीएम के परिजनों की चार कंपनियों को अनुचित तरीके से भारी-भरकम कॉन्ट्रैक्ट्स दिए गए।

नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजनों को मिले सरकारी ठेकों की जांच CBI के हवाले कर दी है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को निर्देश दिया कि वह मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों को सार्वजनिक कार्यों के आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं की गहनता से पड़ताल करे।

अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि सीबीआई इस फैसले की तारीख से महज दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज करे। पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच में 1 जनवरी 2015 से लेकर 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि के दौरान दिए गए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और कार्य आदेशों के आवंटन को शामिल किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को अपनी पहली स्थिति रिपोर्ट (Status Report) दाखिल करने के लिए 16 सप्ताह का समय दिया है। गौरतलब है कि इस मामले में 17 फरवरी को ही फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, जिसके बाद आज यह विस्तृत निर्देश जारी किया गया है।

सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पिछले 10 वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में लगभग 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके पेमा खांडू के परिजनों से जुड़ी चार कंपनियों को दिए गए। याचिकाकर्ता एनजीओ ‘सेव मोन रीजन फेडरेशन’ और ‘वॉलंटरी अरुणाचल सेना’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट में पक्ष रखा।

भूषण ने राज्य सरकार के ही हलफनामे का हवाला देते हुए दलील दी कि कई महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट्स मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों के मालिकाना हक वाली कंपनियों को सौंपे गए। इसमें हितों के टकराव (Conflict of Interest) का सीधा मामला दिखाई देता है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इस जनहित याचिका (PIL) में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के अलावा उनके दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रेमा और उनके भतीजे त्सेरिंग ताशी को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में विशेष रूप से ड्रेमा की कंपनी ‘ब्रांड ईगल्स’ का उल्लेख किया गया है, जिसे कथित तौर पर बड़ी संख्या में सरकारी काम दिए गए।

बता दें कि पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू 2007 से लेकर 2011 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे, जिनकी एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। कोर्ट में राज्य सरकार के वकीलों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे ‘प्रायोजित मुकदमा’ करार देने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए जांच का आदेश दे दिया।

पिछले साल 2 दिसंबर को ही शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को 2015 से 2025 तक के सभी ठेकों का विवरण हलफनामे के जरिए देने को कहा था। अब सीबीआई यह जांच करेगी कि क्या इन टेंडर्स की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर परिवारवाद को बढ़ावा दिया गया या नहीं।

Advertisement

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

Leave a Comment