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Bichiya Pehenne Ke Fayde : गलत पैर में बिछिया पहनने से हो सकता है नुकसान, जानिए सही नियम

Bichiya Pehenne Ke Fayde : हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए बिछिया पहनना केवल एक शृंगार नहीं, बल्कि इसका गहरा वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व भी है। ज्योतिष शास्त्र में चांदी की बिछिया को चंद्रमा का कारक माना गया है जो मानसिक शांति देती है। वहीं, विज्ञान के अनुसार इसे दूसरी उंगली में पहनने से महिलाओं के गर्भाशय (Uterus) से जुड़ी नसों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और मासिक धर्म नियमित रहता है।

Published on: January 18, 2026 6:17 AM
Bichiya Pehenne Ke Fayde
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HIGHLIGHTS

  • वैज्ञानिक कारण: पैर की दूसरी उंगली की नस सीधे गर्भाशय से जुड़ी होती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है।
  • ज्योतिषीय लाभ: चांदी की बिछिया चंद्रमा का प्रतीक है, जो शीतलता और मानसिक शांति प्रदान करती है।
  • नियम: सुहागिन महिलाओं को अपनी पहनी हुई बिछिया कभी किसी और को नहीं देनी चाहिए।
  • कब बदलें: बिछिया टूटने या पुरानी होने पर इसे रविवार, पूर्णिमा या नवरात्रि जैसे शुभ दिनों में बदलना चाहिए।

 

Bichiya Pehenne Ke Fayde : हिंदू परंपराओं में शादी के बाद महिलाओं का सोलह शृंगार करना अनिवार्य माना जाता है। इसमें माथे पर बिंदी, गले में मंगलसूत्र और पैरों में बिछिया पहनना शामिल है।

अक्सर इसे केवल परंपरा या फैशन के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक तर्क और ज्योतिषीय लाभ भी छिपे हैं। सही धातु और सही उंगली में बिछिया धारण करना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है।

बिछिया पहनने के पीछे का विज्ञान

पैरों में बिछिया पहनने का सीधा संबंध महिलाओं के प्रजनन अंगों (Reproductive Organs) से है। विज्ञान के अनुसार, पैर के अंगूठे के ठीक बाद वाली दूसरी उंगली की एक विशेष नस (Nerve) सीधे गर्भाशय (Uterus) से जुड़ी होती है।

जब इस उंगली में बिछिया पहनी जाती है, तो उस नस पर हल्का दबाव बना रहता है। यह दबाव गर्भाशय की ओर रक्त संचार को नियंत्रित करता है, जिससे मासिक धर्म (Periods) नियमित रहते हैं और प्रजनन अंग स्वस्थ बने रहते हैं।

चांदी ही क्यों पहनें?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाहित महिलाओं को हमेशा चांदी की बिछिया पहनने की सलाह दी जाती है। चांदी को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है।

चूंकि चंद्रमा शीतलता प्रदान करता है, इसलिए चांदी धारण करने से महिलाओं को मानसिक शांति मिलती है और उनका मन शांत रहता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सोने के आभूषण कमर के ऊपर और चांदी के आभूषण पैरों में पहनने चाहिए।

किस उंगली में पहनना सही है?

अक्सर महिलाएं फैशन के चक्कर में पैरों की सभी उंगलियों में बिछिया पहन लेती हैं, लेकिन धर्म शास्त्रों के अनुसार यह सही नहीं है। सुहागिन महिलाओं को बिछिया दाहिने और बाएं पैर की केवल दूसरी उंगली में ही पहननी चाहिए।

यह उंगली ही गर्भाशय की नसों को सक्रिय करती है। इसे लक्ष्मी का वाहक भी माना जाता है, इसलिए इसका बार-बार खोना शुभ संकेत नहीं माना जाता।

अपनी बिछिया किसी को न दें

महत्वपूर्ण नियम यह है कि महिलाओं को अपनी पहनी हुई बिछिया उतारकर किसी और को नहीं देनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।

इसे सुहाग की निशानी माना जाता है, इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।

कब और किस दिन बदलें?

वैवाहिक जीवन में टूटी हुई या बहुत पुरानी चीजें पहनना अच्छा नहीं माना जाता। यदि बिछिया टूट जाए या पुरानी हो जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए।

बिछिया बदलने के लिए रविवार का दिन सबसे शुभ माना गया है। इसके अलावा अमावस्या, पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, वट सावित्री, नवरात्रि और करवा चौथ जैसे पर्वों पर भी इसे बदलना या नया पहनना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।

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Ganga

गंगा एक अनुभवी धार्मिक समाचार लेखिका हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 3 वर्षों से अधिक का लेखन अनुभव प्राप्त है। धर्म, संस्कृति और आस्था से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है। वे सटीक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन शैली के लिए जानी जाती हैं। गंगा का उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक घटनाओं, परंपराओं और समसामयिक समाचारों को सरल और विश्वसनीय रूप में पहुँचाना है।

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