Peepal Puja : शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव कम होते हैं। हालांकि, अक्सर लोग जानकारी के अभाव में किसी भी तेल का उपयोग कर लेते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पीपल के नीचे केवल सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इसमें भी चौमुखी दीपक (चार बत्तियों वाला) जलाना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, पूजा में किसी भी खुशबूदार तेल जैसे केवड़े या नारियल तेल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। सरसों का तेल शनि देव को अत्यंत प्रिय है, जिससे नवग्रहों की शांति होती है।
दीपक में क्या डालें और क्या नहीं
दीपक जलाते समय उसमें थोड़े से काले तिल डालना एक अचूक उपाय माना गया है। काले तिल राहु-केतु के दोषों को शांत करते हैं और शनि देव को प्रसन्न करते हैं।
यहाँ एक बात का विशेष ध्यान रखें कि दीपक के तेल में सिक्का बिल्कुल न डालें। यह एक आम गलती है जिससे बचना जरूरी है।
दीपदान का सही समय और नियम
पीपल के नीचे दीया जलाने का सबसे सही समय शाम 5 बजे से 7 बजे के बीच का है। रात 9 बजे के बाद दीपक जलाने से बचना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि इसके बाद पूजा का पूर्ण शुभ फल प्राप्त नहीं होता।
दीपक जलाते समय ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके बाद पीपल के वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और शनि देव से आर्थिक कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें। पीपल की जड़ में थोड़ा मीठा जल अर्पित करने से घर में शांति और लक्ष्मी का वास होता है।
इन बातों का रखें खास ख्याल
जिन लोगों का पैसा कहीं अटका है या कर्ज बढ़ रहा है, वे दीपक जलाने के बाद बिना पीछे मुड़े सीधे अपने घर आ जाएं।
इसके अलावा, साल के पहले शनिवार या किसी भी शनिवार को मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से पूर्ण परहेज करना चाहिए। ऐसा करने से भय से मुक्ति मिलती है और पारिवारिक कलह दूर होता है।



















