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सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी सावन संकष्टी चतुर्थी, जानें किस समय पूजा करने से मिलेगा पूरा फल

सावन महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ आ रही है, जो गणेश जी की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। 2 अगस्त को रखे जाने वाले इस व्रत में पूजा के सही मुहूर्त और चंद्रोदय के समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

Published On: August 3, 2026 7:04 AM
Sawan Sankashti Chaturthi Muhurat Muhurat

Sawan Sankashti Chaturthi Muhurat Muhurat : भगवान गणेश और शिवजी की आराधना के लिए सावन का महीना बेहद खास माना जाता है।

इस दौरान आने वाली संकष्टी चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के तमाम संकट दूर होते हैं।

इस बार अगस्त की शुरुआत में आ रही सावन संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का सुंदर संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस शुभ योग में की गई पूजा-अर्चना का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

कब है सावन संकष्टी चतुर्थी?

पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 1 अगस्त की रात 11:07 बजे से शुरू होगी और 2 अगस्त की रात 11:15 बजे समाप्त होगी।

उदयातिथि और रात में चंद्रमा के दर्शन के समय को देखते हुए सावन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 2 अगस्त को रखा जाएगा।

पूजा के सबसे शुभ मुहूर्त

अगर आप इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा करने की सोच रहे हैं, तो सुबह से दोपहर के बीच कई बेहतरीन मुहूर्त मिल रहे हैं:

  • सुबह की पूजा का मुख्य समय: सुबह 07:24 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
  • व्यापार में वृद्धि के लिए मुहूर्त: सुबह 09:05 बजे से 10:46 बजे तक
  • अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
  • इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त में भी पूजन किया जा सकता है।

चंद्रोदय का समय और अर्घ्य का नियम

संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना अधूरा माना जाता है।

चंद्रोदय का समय: रात 09:24 बजे (लगभग)

चांद निकलने के बाद एक लोटे में जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत (चावल) और सफेद या लाल फूल मिलाएं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करें।

आसान पूजा विधि

सुबह का नियम: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और गणपति का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

पूजा की तैयारी: शाम के समय एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

तिलक और भोग: दीया-धूप जलाएं, भगवान को रोली और चंदन का तिलक लगाएं। फिर ताजे फूल और दूर्वा (दूब घास) ज़रूर चढ़ाएं।

प्रसाद: मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

कथा और आरती: संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें, फिर आरती करके पूजा संपन्न करें।

व्रत खोलना: रात को चांद निकलने पर अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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