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थायरॉइड सिर्फ एक हार्मोनल समस्या नहीं, शरीर के इन अंगों पर डालती है सीधा असर

थायरॉइड केवल वजन कम या ज्यादा होने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपकी इम्युनिटी, किडनी और पाचन तंत्र पर भी गहरा असर डालता है। समय पर इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानकर और सही डाइट अपनाकर इस हार्मोनल समस्या को आसानी से मैनेज किया जा सकता है।

Published On: July 29, 2026 11:26 AM
Thyroid Symptoms

Thyroid Symptoms : थायरॉइड हमारे गले में मौजूद एक छोटी सी ग्रंथि होती है। अक्सर लोग मानते हैं कि इस ग्रंथि में खराबी आने का मतलब सिर्फ वजन का तेजी से बढ़ना या घटना है।

ज्यादातर मामलों में लोग इसे एक आम हार्मोनल बदलाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस बताता है कि थायरॉइड हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करता है।

जब यह ग्रंथि सही से काम नहीं करती, तो शरीर के कई अंदरूनी अंगों पर इसका सीधा असर पड़ता है। आइए समझते हैं कि वजन के अलावा थायरॉइड आपके शरीर के किन तीन प्रमुख हिस्सों को प्रभावित करता है।

1. इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) पर असर

थायरॉइड हार्मोन हमारे शरीर की हर कोशिका की ऊर्जा से जुड़ा होता है। जब शरीर में इस हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम भी कमजोर होने लगता है।

यही वजह है कि अनियंत्रित थायरॉइड वाले लोगों को बार-बार इन्फेक्शन, सर्दी-जुकाम और एलर्जी की शिकायत रहती है।

कुछ मामलों में यह इम्युनिटी को जरूरत से ज्यादा एक्टिव कर देता है। ऐसी स्थिति में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

2. किडनी के काम करने की गति

थायरॉइड और किडनी का कनेक्शन लोगों को आसानी से समझ नहीं आता। लेकिन थायरॉइड हार्मोन किडनी में खून के बहाव और उसे फिल्टर करने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

जिन लोगों को हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड का कम बनना) की शिकायत होती है, उनकी किडनी का काम धीमा पड़ सकता है।

इससे शरीर में पानी रुकने लगता है, जिसे फ्लूइड रिटेंशन कहते हैं। इसी वजह से मरीज के चेहरे और पैरों पर सूजन नजर आने लगती है।

3. गट हेल्थ (पाचन तंत्र) की खराबी

पेट और आंतों की सेहत पर थायरॉइड का असर सबसे ज्यादा पड़ता है, जिसे अक्सर लोग गैस या बदहजमी मान लेते हैं। यह हार्मोन हमारी आंतों की गति को नियंत्रित करता है।

थायरॉइड की कमी होने पर कब्ज, पेट फूलना और भारीपन जैसी दिक्कतें रोजमर्रा का हिस्सा बन जाती हैं। वहीं, हार्मोन ज्यादा बनने पर डायरिया की शिकायत हो सकती है।

पेट खराब रहने की वजह से शरीर खाने से जरूरी पोषक तत्व नहीं सोख पाता। इसके चलते मरीज को हर समय थकान, खून की कमी और विटामिन की कमी का सामना करना पड़ता है।

लक्षणों को कैसे पहचानें?

सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग थकान, कब्ज या सूजन को अलग-अलग बीमारियां मानकर उनका इलाज करते रहते हैं।

अगर आपको लंबे समय से सुस्ती महसूस हो रही है, बिना वजह वजन बदल रहा है या पेट की दिक्कतें ठीक नहीं हो रही हैं, तो एक बार डॉक्टर से सलाह लेकर अपना थायरॉइड टेस्ट जरूर कराएं।

कैसे रखें खुद को सुरक्षित?

  • डाइट का रखें ध्यान: अपने खाने में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। आयोडीन और सेलेनियम से भरपूर चीजें खाएं।
  • दवा में लापरवाही न करें: अगर डॉक्टर ने दवा दी है, तो उसे नियमित रूप से सही समय पर लें।
  • फिजिकल एक्टिविटी: रोजाना हल्का व्यायाम या योग करने से हार्मोन को बैलेंस रखने में मदद मिलती है।
  • नींद और तनाव: रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें और स्ट्रेस को खुद पर हावी न होने दें।

समय पर सही जांच और अच्छी जीवनशैली अपनाकर आप न सिर्फ थायरॉइड को कंट्रोल कर सकते हैं, बल्कि अपने पूरे शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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