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8 नहीं सिर्फ 2 फेज में वोटिंग, बंगाल चुनाव 2026 की इन 5 सीटों पर टिकी सबकी नजरें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिगुल बज चुका है, जहां इस बार मुकाबला सिर्फ 2 चरणों में सिमट गया है। भवानीपुर और नंदीग्राम समेत 5 हॉट सीटों पर दिग्गज चेहरों की साख दांव पर लगी है।

8 नहीं सिर्फ 2 फेज में वोटिंग, बंगाल चुनाव 2026 की इन 5 सीटों पर टिकी सबकी नजरें

HIGHLIGHTS

  • ममता vs शुभेंदु: भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला तय।
  • नया शेड्यूल: 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान, 4 मई को आएंगे नतीजे।
  • दिग्गजों की वापसी: खड़गपुर सदर से भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को फिर मैदान में उतारा।

कोलकाता, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। पश्चिम बंगाल की सत्ता का रास्ता इस बार बेहद कांटेदार नजर आ रहा है, क्योंकि चुनाव आयोग ने पिछली बार के 8 चरणों के मुकाबले इस बार महज 2 चरणों (23 और 29 अप्रैल) में ही वोटिंग कराने का फैसला लिया है। ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने जहां टीएमसी की घेराबंदी मजबूत की है, वहीं भाजपा ने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की अगुवाई में भारी-भरकम फौज उतार दी है।

भवानीपुर: क्या शुभेंदु फिर करेंगे खेल?

कोलकाता की भवानीपुर सीट इस वक्त सबसे बड़ी ‘बैटलग्राउंड’ बन चुकी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट बचाने उतरी हैं, लेकिन भाजपा ने यहां से शुभेंदु अधिकारी को उतारकर मुकाबले को ‘नंदीग्राम पार्ट-2’ बना दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि शुभेंदु इस बार भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। 2021 में नंदीग्राम में ममता को हराने वाले शुभेंदु के नामांकन में खुद गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे थे, जो इस सीट की अहमियत बताता है।

नंदीग्राम: अपनों के बीच घिरे अधिकारी

नंदीग्राम में टीएमसी ने बेहद सधी हुई चाल चली है। यहां शुभेंदु अधिकारी के ही पूर्व करीबी रहे पबित्रा कर को टिकट दिया गया है। पबित्रा कभी नंदीग्राम में शुभेंदु का सारा सांगठनिक काम देखते थे, अब वही उनके खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। भाजपा ने यहां अपने काडर को तरजीह देते हुए पुराने और भरोसेमंद चेहरों पर दांव लगाया है, जिसमें लिएंडर पेस और मिथुन चक्रवर्ती जैसे सितारों का ग्लैमर भी जोड़ा गया है।

मुर्शिदाबाद: त्रिकोणीय संघर्ष में किसका फायदा?

मुर्शिदाबाद सीट पर समीकरण काफी उलझे हुए हैं। यहां मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका में है। टीएमसी ने शाओनी सिंघा रॉय को उतारा है, जबकि भाजपा की ओर से गौरी शंकर घोष मैदान में हैं। 2021 में भाजपा ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार कांग्रेस ने सिद्दीकी अली को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। अगर कांग्रेस मुस्लिम वोटों में सेंध लगाती है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।

जादवपुर और खड़गपुर: प्रतिष्ठा की लड़ाई

जादवपुर में इस बार लेफ्ट के पुनरुत्थान की चर्चा है। सीपीएम ने पूर्व मेयर बिकाश रंजन भट्टाचार्य को उतारकर टीएमसी के देबब्रत मजूमदार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। वहीं, खड़गपुर सदर में भाजपा के ‘दादा’ यानी दिलीप घोष की वापसी हुई है। दिलीप घोष ने 2016 में यहां से जीत हासिल की थी। उनके सामने टीएमसी के प्रदीप सरकार हैं, जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत मानी जाती है। पिछली बार यहां भाजपा महज 4000 वोटों से जीती थी, ऐसे में एंटी-इन्कंबेंसी का डर दोनों दलों को सता रहा है।

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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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