IPO Market News : अगर आप शेयर बाजार में नए इश्यू यानी आईपीओ पर नजर रखते हैं, तो पिछले छह महीने आपके लिए काफी हलचल भरे रहे होंगे. साल की शुरुआत भले ही धीमी रही हो, लेकिन बीते महीनों में प्राइमरी मार्केट ने ऐसी तेजी पकड़ी है जिसने फंड जुटाने के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान 78 मेनबोर्ड कंपनियों ने बाजार से 94,205 करोड़ रुपये जुटाए. यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के 69,533 करोड़ रुपये से करीब 35 फीसदी ज्यादा है.
अगस्त और सितंबर में कैसे बदला पूरा माहौल?
इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सुस्ती का माहौल था और शुरुआती तीन महीनों में कंपनियां महज 3,794 करोड़ रुपये ही जुटा सकी थीं. असली बदलाव अगस्त से शुरू हुआ, जब एक ही महीने में 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे गए.
सितंबर का महीना इससे भी बड़ा साबित हुआ, जहां कुल फंडरेजिंग 40,000 करोड़ रुपये के पार निकल गई. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 22,563 करोड़ रुपये का इश्यू इस छमाही का सबसे बड़ा आकर्षण रहा. इसके साथ ही एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट (₹9,795 करोड़) और मणिपाल हेल्थ (₹9,275 करोड़) जैसे बड़े नामों ने बाजार का भरोसा बढ़ाया.
छोटे निवेशकों की भागीदारी में भारी उछाल

इस बार आईपीओ बाजार की मजबूती केवल बड़े फंड्स के दम पर नहीं, बल्कि आम खुदरा (रिटेल) निवेशकों की बदौलत देखने को मिली है:
- प्रति आईपीओ रिटेल आवेदनों की संख्या 12.69 लाख से बढ़कर 17.71 लाख पहुंच गई.
- छोटे निवेशकों ने कुल मिलाकर 2.47 लाख करोड़ रुपये के शेयरों के लिए बोलियां लगाईं.
- अलॉटमेंट के बाद रिटेल हिस्से में 25,944 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित हुए.
- बाजार में आए 64 में से 42 इश्यूज को 10 गुना से ज्यादा और 25 इश्यूज को 50 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला.
लिस्टिंग गेन बना आकर्षण की सबसे बड़ी वजह
निवेशकों के इस भारी उत्साह के पीछे सीधा कारण लिस्टिंग के दिन मिलने वाला रिटर्न है. इस छमाही में लिस्ट हुए शेयरों ने औसतन 19 फीसदी का लिस्टिंग गेन दिया, जो पिछले साल इसी दौरान केवल 7 फीसदी था.
सितंबर के अंत तक के ट्रेंड को देखें तो 64 में से 46 शेयर अपने इश्यू प्राइस से ऊपर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) ने सेकेंडरी बाजार में बिकवाली के बावजूद प्राइमरी मार्केट में 44,960 करोड़ रुपये का नया निवेश किया.
जुटाई गई रकम का कंपनियां क्या कर रही हैं?
कंपनियों ने जो 94 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी जुटाई, उसमें से 41 फीसदी हिस्सा यानी 38,510 करोड़ रुपये फ्रेश कैपिटल था. राहत की बात यह है कि इस नई पूंजी का 42 फीसदी उपयोग कंपनियों ने अपना पुराना कर्ज चुकाने और बैलेंस शीट को मजबूत करने में किया है. बाकी हिस्सा प्रमोटर्स और शुरुआती निवेशकों के शेयर बेचने (OFS) से जुड़ा था.
आगे की तैयारी और निवेशकों के लिए जरूरी सावधानी
प्राइमरी मार्केट की यह हलचल अभी थमने वाली नहीं है. बाजार नियामक सेबी (SEBI) से 145 कंपनियों को हरी झंडी मिल चुकी है, जो आने वाले समय में करीब 2.78 लाख करोड़ रुपये जुटाएंगी. साथ ही 102 अन्य कंपनियां भी अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं.
अगर आप भी आने वाले आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) या लिस्टिंग गेन की उम्मीद में अंधाधुंध पैसा न लगाएं. कंपनी का बिजनेस मॉडल, उसका वैल्यूएशन और फ्रेश इश्यू व ओएफएस का अनुपात जरूर जांचें.












