8th Pay Commission : केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इस समय वेतन आयोग की प्रगति पर टिकी हैं। आयोग के गठन के बाद से ही कर्मचारी संगठनों के बीच यह चर्चा गर्म है कि नई सिफारिशें फाइलों से निकलकर बैंक खातों तक कब पहुंचेंगी।
सवाल सिर्फ मासिक वेतन में इजाफे का नहीं है। असल उत्सुकता उस एरियर (Arrears) को लेकर है, जो सिफारिशें देरी से लागू होने की स्थिति में एकमुश्त खाते में आता है।
18 महीने की समयसीमा और मौजूदा प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर 2025 को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के टर्म्स ऑफ रेफरेंस तय किए थे। तय नियमावली के तहत आयोग को अपनी रिपोर्ट पूरी करने के लिए 18 महीने का वक्त मिला है।
इस दौरान आयोग रेलवे, रक्षा, डाक और अन्य केंद्रीय विभागों के कर्मचारी प्रतिनिधियों से लगातार मशविरा कर रहा है। उनकी मांगें दर्ज की जा रही हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मसौदा रिपोर्ट तैयार होगी, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) के समक्ष पेश किया जाएगा।
फिटमेंट फैक्टर और एरियर का वित्तीय गणित
वेतन वृद्धि की मूल धुरी फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) पर टिकी होती है। 7वें वेतन आयोग के समय 2.57 का गुणक तय हुआ था, जिसने न्यूनतम बेसिक सैलरी को 7,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 18,000 रुपये कर दिया था। अब कर्मचारी यूनियनें 2.86 से लेकर 3.00 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग उठा रही हैं।
क्या 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएगी नई व्यवस्था?
कर्मचारियों के लिए सबसे राहत भरी बात यह है कि वेतन आयोग की रिपोर्ट आने और उसे कैबिनेट की हरी झंडी मिलने में समय लगने के बावजूद, अमूमन इसे पिछली तारीख से लागू किया जाता है।
पिछले वेतन आयोगों का ट्रेंड बताता है कि नए वेतनमान का असर 1 जनवरी 2026 से ही अपेक्षित माना जा रहा है। अगर सरकार कैबिनेट की बैठक में 1 जनवरी 2026 को ही कट-ऑफ डेट तय करती है, तो आदेश जारी होने तक के सभी महीनों का अंतर कर्मचारियों को एरियर के रूप में एकमुश्त दिया जाएगा।
7वें वेतन आयोग का अनुभव क्या सिखाता है?
अगर पुराने रिकॉर्ड को देखें, तो सातवें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में हुआ था। इसके बाद आयोग ने अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सौंपी और सरकार ने इसे 1 जनवरी 2016 से प्रभावी किया था।
इससे पहले भी पांचवें वेतन आयोग ने करीब 19 महीने और छठे वेतन आयोग ने लगभग 32 महीने का समय लिया था। इतिहास से यह बात साफ है कि आयोग के गठन, रिपोर्ट सौंपने और सैलरी में बढ़ोतरी दिखने की तारीखें अलग-अलग हो सकती हैं। देर होने पर कर्मचारियों का नुकसान नहीं होता, क्योंकि पैसा एरियर के रूप में जुड़ जाता है।
कैसे तय होता है एरियर? एक आसान उदाहरण
अभी नया फिटमेंट फैक्टर और नया बेसिक पे स्ट्रक्चर आधिकारिक रूप से तय नहीं हुआ है। लेकिन एरियर का गणित समझना बेहद सीधा है—पुरानी सैलरी और नए वेतनमान के बीच का अंतर ही एरियर बनता है।

- मान लेते हैं कि मौजूदा ढांचे में किसी कर्मचारी की तय सैलरी 40,500 रुपये बनती है।
- नए वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद यह बढ़कर 46,260 रुपये हो जाती है।
- ऐसे में हर महीने का अंतर 5,760 रुपये हुआ।
अगर यह फैसला लागू होने में 12 महीने का वक्त लगता है और प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 ही रहती है, तो पूरे साल का एरियर लगभग 69,120 रुपये बनेगा।
आगे किस बात पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले महीनों में सबसे अहम पहलू फिटमेंट फैक्टर रहेगा। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये तय हुई थी।
अब आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना रखा जाता है और महंगाई भत्ते (DA) का समायोजन कैसे होता है, इसी पर अंतिम सैलरी का आंकड़ा तय होगा। जब तक आयोग की फाइनल रिपोर्ट पर कैबिनेट की मुहर नहीं लगती, तब तक कर्मचारियों को थोड़ा धैर्य रखना होगा।












