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वेडिंग शॉपिंग से पहले देखें Gold-Silver के नए रेट, चांदी खरीदारों के लिए अच्छी खबर

बाजार में लगातार चौथे दिन चांदी की कीमतों में नरमी दर्ज की गई है, जबकि दो दिन की सुस्ती के बाद सोने के भाव में मामूली बढ़त आई है। अगर आप गहने बनवाने या निवेश का प्लान बना रहे हैं, तो ताजा दरों के साथ खरीदारी की जरूरी सावधानियां जरूर जान लें।

Published On: October 3, 2026 10:42 AM
Gold Silver Price Today

HIGHLIGHTS

  • चांदी 4 दिनों में कुल ₹11,915 सस्ती होकर ₹2.21 लाख प्रति किलो पहुंची।
  • 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹221 बढ़कर ₹1.48 लाख दर्ज किया गया।
  • सोने पर 6 अंकों वाला अल्फान्यूमेरिक HUID हॉलमार्क जांचना अनिवार्य है।

त्योहारी सीजन हो या परिवार में शादी-ब्याह की तैयारी, घर के बजट का सीधा नाता सर्राफा बाजार के रुख से जुड़ा होता है। आज बाजार खुलते ही सोने और चांदी के खरीदारों को मिली-जुली स्थिति देखने को मिली। एक तरफ जहां चांदी की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट से खरीदारों को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ सोने के भाव में हल्की तेजी दर्ज की गई है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमत में 1,165 रुपये प्रति किलो की कमी आई है।

इस गिरावट के बाद एक किलो चांदी का भाव 2.21 लाख रुपये पर आ गया है। पिछले चार दिनों की बात करें तो चांदी कुल मिलाकर 11,915 रुपये तक सस्ती हो चुकी है।

दूसरी ओर, सोने का रुख थोड़ा अलग रहा। बीते दो दिनों से जारी सुस्ती के बाद 24 कैरेट सोने में आज 221 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी देखने को मिली। इसके साथ ही 10 ग्राम सोने का भाव 1.48 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

यानी चांदी लेने वालों के लिए मौका बेहतर हुआ है, जबकि सोना खरीदने वालों को अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी होगी।

अलग-अलग शहरों में क्यों बदल जाते हैं भाव?

अक्सर लोग सोचते हैं कि जब सोना-चांदी पूरे देश में एक ही मानक पर बिकता है, तो शहर बदलते ही कीमतें क्यों बदल जाती हैं। इसके पीछे कुछ सीधे व्यावहारिक कारण हैं:

परिवहन और सुरक्षा खर्च: मुख्य केंद्रों से अलग-अलग राज्यों तक कीमती धातुओं को सुरक्षित पहुंचाने में ढुलाई, सुरक्षा इंतजाम और बीमा का खर्च जुड़ता है, जिससे स्थानीय स्तर पर कीमत बढ़ जाती है।

क्षेत्रीय मांग और व्यापार: दक्षिण भारत जैसे क्षेत्रों में देश की कुल खपत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा रहता है। भारी मांग और स्थानीय टैक्स संरचना की वजह से वहां के रेट में अंतर दिखता है।

स्थानीय एसोसिएशन के नियम: हर जिले या राज्य की स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन दैनिक मांग और आपूर्ति का आकलन करके खुदरा दर तय करती है।

ज्वेलर का पुराना स्टॉक: किसी दुकानदार ने पुराना माल किस भाव पर खरीदा था, वह अपनी बिक्री दर में उसका असर भी जोड़ता है।

साल भर में कैसा रहा उतार-चढ़ाव?

इस साल दोनों धातुओं ने बड़े उतार-चढ़ाव दिखाए हैं। पिछले साल के अंत यानी 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपये पर था, जो अब बढ़कर 1.48 लाख रुपये पर पहुंच चुका है। इसमें लगभग 14,689 रुपये की शुद्ध बढ़त दर्ज की गई है।

इसके उलट, उसी तारीख को चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो आज 2.21 लाख रुपये पर ट्रेड कर रही है। यानी लंबी अवधि में चांदी करीब 9,985 रुपये सस्ती हुई है। रिकॉर्ड स्तरों को देखें तो इसी साल 29 जनवरी को सोना 1.76 लाख रुपये और चांदी 3.86 लाख रुपये के अपने ऐतिहासिक स्तर तक छू चुकी थी।

खरीदारी के वक्त रखें इन बातों का ध्यान

सैलरी या बचत की बड़ी रकम सोने-चांदी में लगाते समय सतर्कता सबसे जरूरी है:

BIS हॉलमार्क जरूर जांचें: बिना हॉलमार्क वाला सोना कभी न लें। नए नियमों के तहत हर गहने पर अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे AZ4524) दर्ज होता है, जिसे बीआईएस केयर ऐप पर सत्यापित किया जा सकता है।

कैरेट का अंतर समझें: 24 कैरेट (शुद्ध सोना), 22 कैरेट (गहने बनाने योग्य) और 18 कैरेट के रेट में काफी फर्क होता है। बिल बनवाते समय सुनिश्चित करें कि चार्ज उसी कैरेट के हिसाब से लगा हो।

घर पर चांदी परखने के घरेलू तरीके: असली चांदी चुंबकीय नहीं होती, इसलिए चुंबक से नहीं चिपकती। असली चांदी की सतह पर बर्फ का टुकड़ा रखने पर वह तेजी से पिघलता है।

इसके अलावा, असली चांदी से किसी तरह की धातु वाली गंध नहीं आती और साफ सफेद सूती कपड़े से रगड़ने पर उस पर हल्का काला निशान छोड़ती है।

दुकान पर मोलभाव करने से पहले IBJA की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर उस दिन के आधिकारिक बेस रेट की जांच जरूर कर लें, ताकि मेकिंग चार्ज और टैक्स का सही अंदाजा मिल सके।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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