RBI Repo Rate Hike : अगर आप होम लोन या कार लोन चुका रहे हैं, तो आने वाला हफ्ता आपके घरेलू बजट के लिहाज से काफी अहम रहने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक तीन दिनों की समीक्षा बैठक करने जा रही है।
इस बैठक के बाद 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा नीतिगत ब्याज दरों यानी रेपो रेट को लेकर फैसले की घोषणा करेंगे। बाजार और अर्थशास्त्रियों के बीच इस बात की चर्चा तेज है कि क्या इस बार ब्याज दरें बढ़ेंगी या आम आदमी को राहत मिलती रहेगी।
फिलहाल क्या है ब्याज दरों की स्थिति?
अगस्त 2026 में हुई पिछली बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। इससे पहले 2025 के दौरान केंद्रीय बैंक ने दरों में 1.25% (125 बेसिस पॉइंट) तक की कटौती की थी, जिससे कर्जदारों को कुछ राहत मिली थी।
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे कमर्शियल बैंकों को छोटी अवधि के लिए फंड देता है। जब यह दर बदलती है, तो बैंक अपने ग्राहकों के लिए नए और पुराने फ्लोटिंग रेट लोन की दरें भी उसी हिसाब से तय करते हैं।
क्या इस बार बढ़ सकती हैं दरें?
वित्तीय विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों के हालिया सर्वे के अनुसार, करीब 60 फीसदी जानकारों का मानना है कि इस बार केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर समिति यह कदम उठाती है, तो रेपो रेट बढ़कर 5.50% हो जाएगी।
इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण देश में बढ़ती खुदरा महंगाई है। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.82% दर्ज की गई, जो रिजर्व बैंक के तय 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर बनी हुई है। खासकर खाने-पीने की चीजों और ईंधन की लागत बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
विदेशी बाजार और रुपये की चाल भी अहम

दरें तय करते समय रिजर्व बैंक घरेलू परिस्थितियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर भी ध्यान देता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियां, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति जैसे कारक भी समिति के सामने रहते हैं। केंद्रीय बैंक को विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ ही महंगाई को काबू में रखना होता है।
आपकी EMI पर क्या फर्क पड़ेगा?
अगर 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर आपके लोन पर कैसे पड़ेगा:

फ्लोटिंग रेट लोन वाले ग्राहक: यदि आपका होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR/RLLR) से जुड़ा है, तो बैंक आपकी ब्याज दर में सीधे 0.25% तक की वृद्धि कर सकते हैं।
किस्त या अवधि में बदलाव: दरें बढ़ने पर बैंक आमतौर पर मासिक किस्त (EMI) की रकम बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि (Tenure) बढ़ा देते हैं। हालांकि, आप चाहें तो अपने बैंक से बात करके EMI राशि भी बढ़वा सकते हैं।
फिक्स्ड रेट लोन वाले सुरक्षित: जिन ग्राहकों ने कार या पर्सनल लोन फिक्स्ड ब्याज दर पर लिया है, उनकी मौजूदा EMI पर इस फैसले का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
फैसला कब और कहां देख सकते हैं?
आरबीआई गवर्नर 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी। बैठक के नतीजे आने के बाद ही स्थिति साफ होगी कि केंद्रीय बैंक मौजूदा 5.25% की दर को जारी रखता है या उसमें बदलाव करता है।










