कौशांबी, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक ऐसी (Viral Qabr News) घटना सामने आई है जिसने मजहबी यकीन और इंसानी समझ के बीच की बहस को तेज कर दिया है। सिराथू तहसील के दारानगर नगर पंचायत में 20 साल पहले सुपुर्दे-खाक किए गए एक मौलाना का शव कब्र के भीतर वैसी ही हालत में मिला है, जैसा उसे दफन करते वक्त था।
दारानगर निवासी अख्तर सुब्हानी के मुताबिक, उनके पिता मौलाना अंसार अहमद का इंतकाल साल 2003 में हुआ था। उन्हें स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाया गया था, लेकिन दो दशकों तक सब कुछ सामान्य रहने के बाद अचानक अख्तर को उनके पिता सपने में दिखाई दिए।
सपने में मौलाना ने अपनी कब्र के जर्जर होने की बात कही और बेटे से इसे दुरुस्त करने की गुजारिश की। सुबह उठकर जब अख्तर परिजनों के साथ कब्रिस्तान पहुंचे, तो देखा कि कब्र वाकई धंस चुकी थी और बेहद खराब स्थिति में थी।

इसके बाद परिजनों ने बरेलवी समुदाय के मौलानाओं से मशविरा किया और धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत कब्र को फिर से बनाने के लिए खुदाई की अनुमति ली। जैसे ही मजदूरों और परिजनों ने मिट्टी हटाकर कब्र के भीतर झांका, वहां मौजूद हर शख्स की चीख निकल गई।
साल 2003 में दफनाए गए मौलाना अंसार अहमद का जनाजा (शव) बिल्कुल महफूज था। आमतौर पर मिट्टी के संपर्क में आने के कुछ ही महीनों में शरीर पंचतत्व में विलीन होने लगता है, लेकिन यहां 20 साल बाद भी न तो कफन गला था और न ही शरीर को कोई नुकसान पहुंचा था।
इलाके में यह खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते हजारों की तादाद में लोग इस ‘करामात’ को देखने के लिए कब्रिस्तान में इकट्ठा हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि मौलाना की रूहानियत का ही असर है कि कुदरत ने उनके जिस्म को छुआ तक नहीं।
परिजनों ने भारी मन और अकीदत के साथ कब्र की साफ-सफाई की और फिर से मिट्टी डालकर उसे दुरुस्त किया। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि मौलाना अंसार अहमद अपने जीवनकाल में बेहद मुत्तकी (परहेजगार) इंसान थे और शायद उनकी इबादत का ही फल है कि दो दशक बाद भी उनका शरीर मिट्टी में नहीं मिला। सिराथू के इस गांव में फिलहाल यह घटना चर्चा का केंद्र बनी हुई है।












