8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल के मुताबिक, नियमों के तहत यह आयोग 1 जनवरी 2026 से देय (Due) है।
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हालांकि, सरकारी मशीनरी की रफ्तार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देखते हुए बढ़ी हुई सैलरी बैंक खातों तक पहुंचने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।
कब तक आएगा बढ़ा हुआ पैसा?
सरकारी प्रक्रिया में वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया जाता है। रिपोर्ट जमा होने के बाद कैबिनेट की मंजूरी और इसे लागू करने की विभागीय प्रक्रियाओं में 6 महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है।
डॉ. पटेल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यदि सब कुछ तय समयसीमा में हुआ, तो कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी जनवरी 2028 तक मिलने की उम्मीद है। यदि सरकार ने तेजी दिखाई, तो यह जुलाई 2027 तक भी संभव हो सकता है।
एरियर का भुगतान: एकमुश्त या किस्तों में?
वेतन आयोग के देर से लागू होने पर सबसे बड़ा सवाल एरियर (बकाया राशि) का होता है। चूंकि आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा, इसलिए एरियर की गणना इसी तारीख से होगी। कर्मचारियों को आशंका थी कि यह पैसा किस्तों में मिलेगा, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार केंद्र सरकार के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए एरियर का भुगतान एकमुश्त ही किए जाने की संभावना है। यानी फैसला 2027 या 2028 में आने पर भी पिछला बकाया एक साथ मिल सकता है।
देरी से जेब पर पड़ेगा भारी असर
भले ही एरियर एक साथ मिलने की बात राहत देती हो, लेकिन आयोग के गठन में देरी का सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स का आकलन है कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) का एरियर आमतौर पर पिछली तारीखों से नहीं दिया जाता है।
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इस तकनीकी पेंच के कारण लेवल-8 के एक अधिकारी को करीब 3.5 से 4 लाख रुपये का सीधा नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, महंगाई भत्ता (DA) 50 फीसदी पार करने के बाद भी बेसिक सैलरी में मर्ज नहीं हुआ है, जिससे कर्मचारी पिछले दो साल से अपनी वास्तविक हकदार सैलरी से कम पा रहे हैं।












