Healthy Atta For Roti : भारतीय घरों में लंच हो या डिनर, रोटी के बिना भोजन अधूरा माना जाता है। हम हर दिन किसी न किसी रूप में रोटी का सेवन जरूर करते हैं।
अमूमन लोग सिर्फ गेहूं के आटे की रोटी ही खाते हैं, लेकिन पारंपरिक भारतीय खानपान में बाजरा, मक्का, ज्वार, रागी और बेसन जैसे कई तरह के आटों का इस्तेमाल होता आया है।
न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, अगर आप अपनी शारीरिक स्वास्थ्य स्थिति और फिटनेस लक्ष्यों के अनुसार सही आटे का चुनाव करते हैं, तो यह आपकी वेलनेस जर्नी में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
जौ की रोटी: दिल और लिवर के लिए संजीवनी
जौ के आटे में सॉल्यूबल फाइबर और सेलेनियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यह शरीर के बेली फैट को कम करने में मदद करती है और इंसुलिन रिस्पॉन्स को बेहतर बनाती है।
इसके नियमित सेवन से लिवर और हार्ट हेल्थ को मजबूत सपोर्ट मिलता है। जिन लोगों को प्री-डायबिटीज, फैटी लिवर या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उनके लिए जौ की रोटी एक बेहतरीन विकल्प है।
इन्हें करना चाहिए परहेज: जिन लोगों को ग्लूटेन सेंसिटिविटी या इससे एलर्जी की शिकायत है, उन्हें जौ की रोटी खाने से पूरी तरह बचना चाहिए।
रागी की रोटी: हड्डियों की मजबूती और शुगर कंट्रोल
रागी का आटा कैल्शियम, आयरन और फाइबर का एक समृद्ध स्रोत है। यह वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करता है और खून में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखता है। यह हड्डियों और जोड़ों को अंदरूनी मजबूती देता है।
डायबिटीज के मरीजों और वजन कम करने की चाहत रखने वालों के लिए यह परफेक्ट है। इसके अलावा, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में बोन डेंसिटी कम होने लगती है, इसलिए उनके लिए भी रागी की रोटी बेहद फायदेमंद साबित होती है।
इन्हें करना चाहिए परहेज: यदि आपका पाचन तंत्र काफी कमजोर है या आपको किडनी से जुड़ी कोई बीमारी है, तो रागी का सेवन न करें।
मल्टीग्रेन रोटी: गट हेल्थ और पोषक तत्वों की पूर्ति
मल्टीग्रेन आटे में फाइबर, बी-विटामिंस और आवश्यक मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पेट के स्वास्थ्य और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में कारगर है। यह शरीर से अतिरिक्त फैट को कम करता है और शरीर में न्यूट्रिशन की कमी को पूरा करता है।
पीसीओएस, मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों या सामान्य रूप से खुद को फिट रखने की चाहत रखने वालों को इसे डाइट में शामिल करना चाहिए।
इन्हें करना चाहिए परहेज: यदि आप ग्लूटेन इनटोलरेंस की समस्या से पीड़ित हैं, तो मल्टीग्रेन रोटी खाने से पूरी तरह परहेज करें।

बाजरा की रोटी: सर्दियों में एनर्जी और खून बढ़ाने का जरिया
बाजरे के आटे में आयरन, जिंक और इन्सॉल्यूबल फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने, शारीरिक ऊर्जा और स्टैमिना को इंप्रूव करने में मदद करता है।
जो लोग बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी या मेहनत का काम करते हैं, उन्हें इसे खाना चाहिए। एनीमिया से पीड़ित मरीजों और सर्दियों के मौसम में बाजरे की रोटी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है।

इन्हें करना चाहिए परहेज: यदि आपके शरीर में तासीर गर्म रहती है, अत्यधिक एसिडिटी होती है या आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) से पीड़ित हैं, तो बाजरा न खाएं।
बेसन की रोटी: प्रोटीन का पावरहाउस और शुगर स्टेबलाइजर
चने के दाने से तैयार बेसन में प्रोटीन, फोलेट और फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यह शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है, फैट लॉस की प्रक्रिया को तेज करता है और ब्लड शुगर के स्तर को स्थिर रखता है।
डायबिटीज, मोटापा या पीसीओडी की समस्या से परेशान लोगों के लिए बेसन की रोटी डाइट का एक बेहतरीन हिस्सा बन सकती है।
इन्हें करना चाहिए परहेज: जिन लोगों को पेट में अत्यधिक गैस बनती है या पेट हमेशा फूला हुआ महसूस होता है, उन्हें बेसन की रोटी खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह समस्या बढ़ा सकती है।
ज्वार की रोटी: ब्लोटिंग और कोलेस्ट्रॉल से राहत

ज्वार के आटे में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और मैग्नीशियम मौजूद होते हैं। ज्वार की रोटी पेट की गट हेल्थ को बेहतर बनाती है, दिल की सेहत को दुरुस्त रखती है और कोलेस्ट्रॉल लेवल को तेजी से कम करती है।
जिन लोगों को बार-बार ब्लोटिंग की शिकायत होती है, जिनका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा रहता है या जिन्हें ग्लूटेन सेंसिटिविटी है, उनके लिए ज्वार की रोटी सबसे उत्तम और सुरक्षित विकल्प है।
इन्हें करना चाहिए परहेज: यदि आपकी पाचन शक्ति बहुत ज्यादा खराब है या आपके पेट का गट मूवमेंट बेहद धीमा है, तो ज्वार की रोटी का सेवन न करें।
चावल की रोटी: कमजोर पाचन वालों के लिए आसान विकल्प
चावल के आटे से बनी रोटी पचने में बेहद आसान और हल्की होती है। जिन लोगों का डाइजेशन सिस्टम कमजोर रहता है, उनके लिए यह सबसे बेस्ट फूड है। यह शरीर को तुरंत कार्बोहाइड्रेट और एनर्जी प्रदान करती है। इसके साथ ही यह पूरी तरह से एक ग्लूटेन फ्री विकल्प है, जिसे आसानी से खाया जा सकता है।
इन्हें करना चाहिए परहेज: यदि आप डायबिटीज यानी मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं, तो आपको चावल की रोटी खाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
सोया रोटी: शाकाहारियों के लिए कंप्लीट प्रोटीन
सोयाबीन के आटे से बनी रोटी में कंप्लीट प्रोटीन होता है और इसमें आइसोफ्लावोन भी पाए जाते हैं। यह मांसपेशियों के निर्माण यानी मसल बिल्डिंग और वर्कआउट के बाद रिकवरी को बेहतरीन सपोर्ट देती है।
यह बार-बार लगने वाली भूख और क्रेविंग को शांत करती है तथा शरीर में हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखती है। जो लोग पूरी तरह शाकाहारी हैं, जिम जाते हैं या जिनकी डाइट में प्रोटीन कम है, उनके लिए यह परफेक्ट है।
इन्हें करना चाहिए परहेज: यदि आपको थायराइड की समस्या है, तो आपको सोया रोटी खाने से पूरी तरह बचना चाहिए।
ओट्स की रोटी: बेली फैट और दिल की सेहत का साथी
ओट्स के आटे में प्रोटीन और सॉल्यूबल फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है। यह पेट की जिद्दी चर्बी यानी बेली फैट को कम करने, शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल को सुधारने और अचानक बढ़ने वाले ब्लड शुगर स्पाइक को रोकने में मदद करती है।
डायबिटीज के मरीजों, दिल को स्वस्थ रखने की चाहत रखने वालों और वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ओट्स की रोटी एक सही आहार है।
इन्हें करना चाहिए परहेज: यदि आपका पेट काफी संवेदनशील है या आपको अक्सर ब्लोटिंग और गैस की समस्या बनी रहती है, तो ओट्स की रोटी आपकी इस परेशानी को और ज्यादा बढ़ा सकती है।
















