नई दिल्ली : राजधानी के शालीमार बाग इलाके में 10 जनवरी की शाम कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। यहां 44 वर्षीय रचना यादव की उनके घर के पास ही गोली मारकर हत्या कर दी गई।
रचना कोई आम महिला नहीं थीं, बल्कि साल 2023 में जहांगीरपुरी में हुए अपने पति विजेंद्र यादव की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थीं। यह हमला तब हुआ जब वे अपने पति के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ रही थीं।
जमानत रद्द होते ही खूनी खेल
रचना यादव पिछले काफी समय से अपने पति के इंसाफ के लिए अदालतों के चक्कर काट रही थीं। इस मामले के आरोपी भरत यादव को हाल ही में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। रचना ने हार नहीं मानी और इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द कर दी थी।
पुलिस सूत्रों और परिजनों के मुताबिक, जमानत रद्द होने के बाद से ही रचना को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। लेकिन कातिलों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने सिस्टम की नाक के नीचे इस वारदात को अंजाम दे दिया।
पार्क में दिया वारदात को अंजाम
घटना उस वक्त हुई जब रचना अपने घर के पास स्थित एक पार्क में कपड़े सुखाने गई थीं। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे और पार्क में पहले से घात लगाए बैठे थे।
जैसे ही रचना वहां पहुंचीं, हमलावरों ने बेहद नजदीक (पॉइंट-ब्लैंक रेंज) से उनके सिर और सीने में गोलियां दाग दीं। गोली लगते ही वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ीं। हमलावर हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए।
‘अब मेरा कोई नहीं बचा’
इस हत्याकांड ने एक 14 साल की मासूम बच्ची की दुनिया उजाड़ दी है। तीन साल पहले पिता की हत्या हुई और अब मां भी नहीं रहीं। अस्पताल के बाहर बिलखती बेटी ने वहां मौजूद हर शख्स को झकझोर दिया। उसने सिसकते हुए कहा, “जिसने पापा को छीना, उसी ने आज मेरी मां को मार डाला।
मां बहुत बहादुर थी, वो पापा के लिए लड़ रही थी।” बच्ची का भविष्य अब अंधकार में है, क्योंकि उसे डर है कि हत्यारे अब उसे भी निशाना बना सकते हैं।
विटनेस प्रोटेक्शन पर सवालिया निशान
रचना की हत्या ने दिल्ली पुलिस की ‘विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम’ (गवाह सुरक्षा योजना) की पोल खोलकर रख दी है। सवाल उठ रहे हैं कि जब मृतका सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगा रही थी और उसे धमकियां मिल रही थीं, तो स्थानीय पुलिस ने उसे सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराई?
बेटी का सीधा आरोप है कि पुलिस को खतरे के बारे में बताया गया था, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। अगर समय रहते सुरक्षा मिली होती, तो शायद आज यह परिवार पूरी तरह खत्म नहीं होता।

















