Ramkesh Meena Murder Case : दिल्ली पुलिस ने तिमारपुर में हुए UPSC अभ्यर्थी रामकेश मीणा हत्याकांड की जांच पूरी करते हुए तीस हजारी कोर्ट में 813 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है.
पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाने के लिए अपने इतिहास में पहली बार ‘गेट एनालिसिस’ (Gait Analysis) तकनीक का इस्तेमाल किया है. जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज में धुंधले चेहरों के बावजूद आरोपियों को उनके चलने के तरीके से पहचानकर सलाखों के पीछे पहुंचाया है.
‘चाल’ बनी सबसे बड़ा सबूत
जांच के दौरान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान थी, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज में उनके चेहरे साफ नजर नहीं आ रहे थे. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने गुजरात से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली. विशेषज्ञों ने घटना स्थल के आसपास लगे पांच कैमरों की फुटेज का अध्ययन किया.
इसमें आरोपियों के चलने के स्टाइल, कदमों की दूरी और हाथ-पैर हिलाने के तरीके (गेट एनालिसिस) का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया. इसके बाद पकड़े गए संदिग्धों का ‘री-क्रिएटेड’ वीडियो बनाया गया और मिलान करने पर यह सौ फीसदी सटीक पाया गया.
प्यार, धोखा और खौफनाक साजिश
चार्जशीट के मुताबिक, रामकेश मीणा आईएएस बनने का सपना लेकर दिल्ली आया था और तिमारपुर में रह रहा था. यहां उसकी मुलाकात सिविल सेवा की तैयारी कर रही अमृता चौहान से हुई और दोनों लिव-इन में रहने लगे. कुछ समय बाद अमृता की नजदीकी अपने पूर्व प्रेमी सुमित कश्यप से फिर बढ़ गई.
अमृता इस बात से नाराज थी कि रामकेश उसके कुछ निजी वीडियो (Intimate Videos) डिलीट नहीं कर रहा था. इसी विवाद के चलते अमृता ने सुमित और उसके दोस्त संदीप कुमार के साथ मिलकर रामकेश को रास्ते से हटाने की योजना बना ली.
हादसा दिखाने के लिए लाश जलाई
साजिश के तहत 5 अक्टूबर 2025 की रात आरोपियों ने रामकेश को बुरी तरह पीटा और मोबाइल चार्जिंग केबल से उसका गला घोंट दिया. हत्या को हादसा दिखाने के लिए उन्होंने शव पर पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी, ताकि यह शॉर्ट सर्किट या आग लगने की दुर्घटना लगे. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस थ्योरी को खारिज कर दिया.
रिपोर्ट में मृतक के फेफड़ों में धुएं के कण मिले, जिससे साबित हुआ कि जलते समय रामकेश की सांसें चल रही थीं. इसके अलावा, एसी कंपनी के एक्सपर्ट्स ने पुष्टि की कि कंप्रेसर में कोई खराबी नहीं थी, यानी आग जानबूझकर लगाई गई थी.
55 गवाह और डिजिटल सुराग
तिमारपुर थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर पंकज तोमर की टीम ने जांच में पाया कि अमृता इंस्टाग्राम के जरिए रियल-टाइम में हत्यारों को निर्देश दे रही थी. उसने मैसेज कर बताया था कि रामकेश कमरे में अकेला है. हत्या पूरी तरह से प्री-प्लांड थी, क्योंकि आरोपियों ने वारदात के बाद छिपने के लिए छतरपुर में पहले से ही कमरा किराए पर ले रखा था.
पुलिस ने चार्जशीट में 55 गवाहों के बयान शामिल किए हैं. गेट एनालिसिस तकनीक इससे पहले मुंबई के साकीनाका केस, गौरी लंकेश हत्याकांड और रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट की जांच में भी कारगर साबित हो चुकी है.









