Depression Physical Symptoms : अक्सर लोग मानते हैं कि डिप्रेशन का मतलब सिर्फ उदास रहना, किसी से बात न करना या अकेले कमरे में बैठना है।
सच यह है कि डिप्रेशन केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहता, यह पूरे शरीर पर असर डालता है। हमारा दिमाग और शरीर एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए जब मानसिक स्तर पर दबाव बढ़ता है, तो शरीर में भी कई तरह के बदलाव और परेशानियां दिखने लगती हैं।
अगर आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति लंबे समय से इन शारीरिक समस्याओं का सामना कर रहा है, तो इसे सामान्य मानकर टालने के बजाय समझना जरूरी है।

नींद का पैटर्न पूरी तरह बिगड़ जाना
डिप्रेशन का सबसे पहला असर सोने की आदतों पर पड़ता है। कुछ लोगों को रातभर करवटें बदलने के बाद भी नींद नहीं आती या बार-बार आंख खुलती है।
वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें हर वक्त नींद आती रहती है और वे दिन में 10-12 घंटे सोने के बाद भी सुस्त महसूस करते हैं। नींद का यह असंतुलन आपके दिल और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है।
आराम करने के बाद भी लगातार थकान
अगर आप दिनभर बिना कोई भारी काम किए भी थकावट महसूस करते हैं, तो यह चिंता की बात हो सकती है। डिप्रेशन में शरीर की ऊर्जा का स्तर बहुत गिर जाता है।
सुबह उठते ही भारीपन लगना या छोटे-छोटे घरेलू काम करने में भी हिम्मत टूटना इसी का एक हिस्सा है। यह थकान सामान्य आराम से ठीक नहीं होती।

मांसपेशियों, जोड़ों और सिर में लगातार दर्द
दिमाग के जो केमिकल्स हमारे मूड को संभालते हैं, वही दर्द को महसूस करने के सिग्नल भी तय करते हैं। जब तनाव या डिप्रेशन बढ़ता है, तो शरीर में दर्द सहने की क्षमता कम हो जाती है।
बिना किसी चोट या भारी काम के भी कंधों, पीठ, जोड़ों में दर्द बना रहता है। कई लोगों में यह लगातार रहने वाले सिरदर्द या माइग्रेन के रूप में भी सामने आता है।
पेट और पाचन से जुड़ी दिक्कतें
हमारे पेट को अक्सर दूसरा दिमाग कहा जाता है, क्योंकि आंतों और नर्वस सिस्टम का बहुत गहरा तालमेल है। मानसिक तनाव बढ़ते ही पाचन क्रिया धीमी या असंतुलित हो जाती है।
इसके चलते बिना किसी गलत खानपान के भी अपच, कब्ज, पेट में ऐंठन, गैस या बार-बार जी मिचलाने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

हृदय स्वास्थ्य पर असर
लंबे समय तक डिप्रेशन में रहने से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर पर भी नकारात्मक दबाव पड़ता है।
शरीर में तनाव वाले हार्मोन्स बढ़ने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए अगर लगातार सीने में भारीपन या घबराहट महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
कब लें डॉक्टर या एक्सपर्ट की मदद?
अगर ऊपर बताए गए लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बने रहें और खानपान सुधारने या आराम करने के बाद भी राहत न मिले, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह कमजोरी किसी साधारण बीमारी की नहीं, बल्कि तनाव की हो सकती है।
किसी अच्छे फिजिशियन या मेंटल हेल्थ काउंसलर से खुलकर बात करना आपकी सेहत को दोबारा सही रास्ते पर ला सकता है।














