Nose Picking Health Risks : अक्सर आपने मेट्रो, बस या दफ्तर में लोगों को नाक में उंगली डालते हुए देखा होगा। इसे आमतौर पर हम महज एक ‘गंदी आदत’ या खराब मैनर्स मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
लेकिन मेडिकल साइंस की नजर में यह छोटी सी हरकत आपकी सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। यह आदत न केवल नाक के नाजुक टिश्यू को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि सीधे आपके दिमाग की नसों को भी खतरे में डाल सकती है।
बैक्टीरिया का सीधा प्रवेश द्वार
नाक के अंदर की त्वचा बेहद नाजुक होती है। बार-बार उंगली डालने से वहां की स्किन छिल जाती है और खून बहने लगता है। खतरा तब बढ़ जाता है जब उंगलियों पर मौजूद बैक्टीरिया इन घावों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
एक खास बैक्टीरिया, ‘क्लैमाइडिया न्यूमोनिया’, नाक के रास्ते दिमाग तक पहुंच सकता है। यह बैक्टीरिया घ्राण (olfactory) और ट्राइजेमिनल तंत्रिकाओं के जरिए सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर हमला करता है।
सोर्स के मुताबिक, यह बैक्टीरिया दिमाग में ऐसे बदलावों को ट्रिगर कर सकता है जो आगे चलकर अल्जाइमर (Alzheimer’s disease) और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
फोड़े और मवाद का खतरा
नाक छेड़ने की आदत से ‘नेजल वेस्टिबुलिटिस’ (Nasal vestibulitis) हो सकता है। इसमें नाक के अंदर पपड़ी जमना, लालिमा और तेज दर्द होता है। इसके अलावा, बालों की जड़ों (hair follicles) में इन्फेक्शन फैलने से फोड़े निकल सकते हैं।
सबसे गंभीर स्थिति ‘सेप्टल एब्सेस’ (Septal Abscess) की है। यह एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक स्थिति है जिसमें नाक के सेप्टम (दोनों नथुनों के बीच की दीवार) के भीतर मवाद जमा हो जाता है।
अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह नाक को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में इसके लिए सर्जरी और हैवी एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ती है।
सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है जोखिम?
सर्दियों में हवा में नमी कम होने के कारण नाक अंदर से सूख जाती है और फट जाती है। ऐसे में उंगली डालने पर इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
शुष्क त्वचा और जलन से बचने के लिए लोग बार-बार नाक छूते हैं, जो अनजाने में बैक्टीरिया को न्यौता देता है।
बचाव के लिए क्या करें
इस आदत को छोड़ने और नाक को सुरक्षित रखने के लिए नमी बनाए रखना सबसे जरूरी है। आप सलाइन नेजल स्प्रे का उपयोग कर सकते हैं।
घर में ह्यूमिडिफायर चलाने से हवा में नमी रहती है, जिससे नाक का सूखापन और गले की खराश कम होती है। साथ ही, अपने नाखूनों को हमेशा छोटा रखें ताकि अनजाने में भी नाक के अंदरूनी हिस्से में खरोंच न लगे।
अगर एलर्जी या ज्यादा सूखापन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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