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Nose Picking Health Risks : नाक से दिमाग तक पहुँच सकता है क्लैमाइडिया बैक्टीरिया, आज ही छोड़ दें ये खतरनाक आदत

Nose Picking Health Risks : नाक में उंगली डालने की आदत सिर्फ सामाजिक शर्मिंदगी का कारण नहीं है, बल्कि यह अल्जाइमर और गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन का जरिया बन सकती है। सर्दियों में नाक का सूखापन इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे बैक्टीरिया सीधे आपके दिमाग तक पहुंच सकते हैं।

Published on: January 21, 2026 7:26 AM
Nose Picking Health Risks
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HIGHLIGHTS

  • दिमाग पर असर: नाक के रास्ते 'क्लैमाइडिया न्यूमोनिया' बैक्टीरिया दिमाग तक पहुंचकर अल्जाइमर का खतरा बढ़ा सकता है।
  • गंभीर संक्रमण: इस आदत से 'सेप्टल एब्सेस' जैसी स्थिति बन सकती है, जिसमें सर्जरी तक की नौबत आ सकती है।
  • सर्दियों में जोखिम: शुष्क हवा से नाक के अंदरूनी हिस्से में दरारें पड़ जाती हैं, जिससे इन्फेक्शन तेजी से फैलता है।
  • बचाव के उपाय: सलाइन स्प्रे और ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल कर नाक में नमी बनाए रखना जरूरी है।

Nose Picking Health Risks : अक्सर आपने मेट्रो, बस या दफ्तर में लोगों को नाक में उंगली डालते हुए देखा होगा। इसे आमतौर पर हम महज एक ‘गंदी आदत’ या खराब मैनर्स मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

लेकिन मेडिकल साइंस की नजर में यह छोटी सी हरकत आपकी सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। यह आदत न केवल नाक के नाजुक टिश्यू को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि सीधे आपके दिमाग की नसों को भी खतरे में डाल सकती है।

बैक्टीरिया का सीधा प्रवेश द्वार

नाक के अंदर की त्वचा बेहद नाजुक होती है। बार-बार उंगली डालने से वहां की स्किन छिल जाती है और खून बहने लगता है। खतरा तब बढ़ जाता है जब उंगलियों पर मौजूद बैक्टीरिया इन घावों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

एक खास बैक्टीरिया, ‘क्लैमाइडिया न्यूमोनिया’, नाक के रास्ते दिमाग तक पहुंच सकता है। यह बैक्टीरिया घ्राण (olfactory) और ट्राइजेमिनल तंत्रिकाओं के जरिए सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर हमला करता है।

सोर्स के मुताबिक, यह बैक्टीरिया दिमाग में ऐसे बदलावों को ट्रिगर कर सकता है जो आगे चलकर अल्जाइमर (Alzheimer’s disease) और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।

फोड़े और मवाद का खतरा

नाक छेड़ने की आदत से ‘नेजल वेस्टिबुलिटिस’ (Nasal vestibulitis) हो सकता है। इसमें नाक के अंदर पपड़ी जमना, लालिमा और तेज दर्द होता है। इसके अलावा, बालों की जड़ों (hair follicles) में इन्फेक्शन फैलने से फोड़े निकल सकते हैं।

सबसे गंभीर स्थिति ‘सेप्टल एब्सेस’ (Septal Abscess) की है। यह एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक स्थिति है जिसमें नाक के सेप्टम (दोनों नथुनों के बीच की दीवार) के भीतर मवाद जमा हो जाता है।

अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह नाक को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में इसके लिए सर्जरी और हैवी एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ती है।

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है जोखिम?

सर्दियों में हवा में नमी कम होने के कारण नाक अंदर से सूख जाती है और फट जाती है। ऐसे में उंगली डालने पर इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

शुष्क त्वचा और जलन से बचने के लिए लोग बार-बार नाक छूते हैं, जो अनजाने में बैक्टीरिया को न्यौता देता है।

बचाव के लिए क्या करें

इस आदत को छोड़ने और नाक को सुरक्षित रखने के लिए नमी बनाए रखना सबसे जरूरी है। आप सलाइन नेजल स्प्रे का उपयोग कर सकते हैं।

घर में ह्यूमिडिफायर चलाने से हवा में नमी रहती है, जिससे नाक का सूखापन और गले की खराश कम होती है। साथ ही, अपने नाखूनों को हमेशा छोटा रखें ताकि अनजाने में भी नाक के अंदरूनी हिस्से में खरोंच न लगे।

अगर एलर्जी या ज्यादा सूखापन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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Rama Pun

रमा पुन एक प्रशिक्षित और अनुभवी लेखिका हैं, जो हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों में विशेषज्ञता रखती हैं। विभिन्न न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर 3 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, रमा पाठकों के लिए सटीक और रोचक कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खूबी जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत करना है, जिससे आम पाठक भी उसे आसानी से समझ सकें। 📧 Email: punr29638@gmail.com

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