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Glasgow Commonwealth Games 2026 में भारत ने जीते कुल 39 मेडल, मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा

ग्लासगो में 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स का समापन हो गया है, जहां भारत ने 13 स्वर्ण समेत कुल 39 पदक जीतकर तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। 6 प्रमुख खेलों के हटाए जाने के बावजूद बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और सरकारी फंडिंग के सही इस्तेमाल से भारतीय एथलीटों ने यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया।

India wins 39 medals at Glasgow Commonwealth Games 2026, finishes fourth in tally

HIGHLIGHTS

  • भारत ने ग्लासगो 2026 में 39 मेडल जीते
  • पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर रहा
  • बॉक्सरों ने 7 गोल्ड समेत 10 पदक हासिल किए
  • एथलेटिक्स में भारत के मेडल बढ़कर 16 हुए

नई दिल्ली, 3 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Glasgow Commonwealth Games 2026 : स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स का औपचारिक समापन हो गया है। 23 जुलाई से 2 अगस्त तक चले इस खेल महाकुंभ में 74 देशों के एथलीटों ने 13 अलग-अलग खेलों में हिस्सा लिया। भारतीय दल ने इस बार कुल 39 पदक अपने नाम करते हुए पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया है। भारत के खाते में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं।

यह प्रदर्शन इसलिए असाधारण माना जा रहा है क्योंकि इस बार ऐसे 6 खेलों को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया था जो भारत के मेडल के सबसे बड़े जरिए हुआ करते थे। बर्मिंघम में आयोजित पिछले खेलों में भारत ने क्रिकेट, टेबल टेनिस, रेसलिंग, हॉकी, बैडमिंटन और स्क्वैश में कुल 30 मेडल जीते थे। इन खेलों के न होने के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों का 39 पदकों तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि है।

भारतीय मुक्केबाजों ने इस बार रिंग में जबरदस्त दबदबा दिखाया। बॉक्सिंग में भारत को 7 गोल्ड समेत कुल 10 मेडल मिले हैं। पिछला प्रदर्शन देखें तो भारतीय मुक्केबाजों ने केवल 7 मेडल (3 गोल्ड, 1 सिल्वर, 3 ब्रॉन्ज) जीते थे। इस बार 3 अतिरिक्त पदकों के साथ मुक्केबाजों ने भारत को तालिका में ऊपर बनाए रखा।

एथलेटिक्स के ट्रैक एंड फील्ड मुकाबलों में भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन दोगुना बेहतर रहा। ग्लासगो 2026 में भारत ने एथलेटिक्स में 3 गोल्ड, 7 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज के साथ 16 पदक अपने नाम किए। बर्मिंघम खेलों में एथलेटिक्स में भारत के पास सिर्फ 8 मेडल (1 गोल्ड, 4 सिल्वर, 3 ब्रॉन्ज) ही आए थे।

जूडो के मैट पर भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी। ग्लासगो में जूडोकाओं ने कुल 4 पदक जीते, जिसमें 2 गोल्ड, 1 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल शामिल है। पिछले खेलों में जूडो में भारत को सिर्फ 3 मेडल मिले थे।

वेटलिफ्टिंग और पैरा पावरलिफ्टिंग में पदकों की संख्या में पिछले प्रदर्शन के मुकाबले थोड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और जूडो में मिले अतिरिक्त पदकों ने इस कमी को पूरी तरह से ढक दिया।

इस बड़ी सफलता के पीछे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत के साथ-साथ सही समय पर मिला वित्तीय समर्थन भी प्रमुख कारण रहा। केंद्र सरकार ने इस टूर्नामेंट की तैयारी के लिए ‘एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन’ (ACTC) और ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) के तहत 53.09 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया था।

सबसे ज्यादा बजट एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) को जारी किया गया था। एथलीटों की तैयारी और विदेशी दौरों के लिए एथलेटिक्स संघ को 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई थी। नतीजतन एथलेटिक्स में भारत के मेडल की संख्या सीधी दोगुनी हो गई।

बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया को खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक दिए गए थे। इसी तरह इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन को 5 से 7.5 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था। जिम्नास्टिक, जूडो, साइकिलिंग, स्विमिंग, लॉन बाउल्स और पैरा एथलेटिक्स महासंघों के बीच 15.59 करोड़ से 18.09 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इस फंड का बड़ा हिस्सा एथलीटों को विदेश में उच्च स्तरीय ट्रेनिंग दिलाने में इस्तेमाल हुआ।

ग्लासगो खेलों के समापन समारोह के साथ ही कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स फ्लैग सौंपने की रस्म पूरी की गई। भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने ध्वज स्वीकार कर इसे भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी को सौंपा। अगला 24वां कॉमनवेल्थ गेम्स चार साल बाद भारत के अहमदाबाद में आयोजित किया जाएगा।

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Vibhor Sharma

विभोर शर्मा 'दून हॉराइज़न' के वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं। क्रिकेट, फुटबॉल, ओलंपिक्स और अन्य प्रमुख खेल आयोजनों की गहरी समझ और उनका सटीक विश्लेषण विभोर की सबसे बड़ी खूबी है। वे मैदान के अंदर और बाहर की हर महत्वपूर्ण गतिविधि को पूरी प्रामाणिकता के साथ कवर करते हैं। खिलाड़ियों के प्रदर्शन, मैच प्रेडिक्शन और खेल विवादों पर उनकी शोध-आधारित रिपोर्टिंग पाठकों को एक स्पष्ट नज़रिया देती है। क्लिकबेट से दूर, विभोर की तथ्यपरक खेल पत्रकारिता खेल प्रेमियों के लिए खबरों का एक सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है।

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