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Dehradun : भीख मांगने वाले हाथ अब चला रहे कंप्यूटर, 154 बच्चे पहुंचे स्कूल

देहरादून में भिक्षावृत्ति और कूड़ा बीनने के काम से मुक्त कराए गए 154 बच्चे अब स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिला प्रशासन का इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) न केवल बच्चों का जीवन संवार रहा है, बल्कि यह अब विश्वविद्यालयों के लिए सामाजिक शोध का एक प्रमुख केंद्र भी बन गया है।

Published on: January 18, 2026 4:22 PM
Dehradun : भीख मांगने वाले हाथ अब चला रहे कंप्यूटर, 154 बच्चे पहुंचे स्कूल
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HIGHLIGHTS

  • बड़ा बदलाव: भिक्षावृत्ति और बालश्रम से मुक्त कराए गए कुल 154 बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा गया।
  • शोध केंद्र: IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सेंटर का दौरा कर इसे केस स्टडी के रूप में समझा।
  • सुविधाएं: साधुराम इंटर कॉलेज स्थित सेंटर में बच्चों को कंप्यूटर, संगीत और कैब जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।
  • ताजा अपडेट: शनिवार को 27 और बच्चों का विभिन्न सरकारी विद्यालयों में दाखिला कराया गया।

देहरादून : जिला प्रशासन की पहल से सड़कों पर बचपन बिताने को मजबूर बच्चों के हाथ में अब भिक्षा के कटोरे की जगह किताबें हैं। साधुराम इंटर कॉलेज में चल रहे आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) के प्रयासों से अब तक 154 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। इसी कड़ी में शनिवार को रेस्क्यू किए गए 27 बच्चों का विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश कराया गया।

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शोध और संवेदना का नया केंद्र

जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह सेंटर अब केवल पुनर्वास स्थल नहीं रहा, बल्कि शैक्षणिक शोध का केंद्र भी बन गया है। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र यहां आकर इस बदलाव को समझ रहे हैं। हाल ही में IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के 12 छात्र-छात्राओं ने सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र यादव के नेतृत्व में सेंटर का भ्रमण किया।

इस दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों ने खुद बनाए हुए कार्ड और स्वागत नृत्य के जरिए अतिथियों का अभिनंदन किया। छात्रों ने माना कि बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और टीमवर्क का यह विकास प्रशासन की ‘माइंड रिफॉर्मेशन’ तकनीक का परिणाम है।

दिसंबर 2024 से जारी है अभियान

दिसंबर 2024 से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक कुल 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें 83 बच्चे भिक्षावृत्ति, 117 बच्चे कूड़ा बीनने और 67 बच्चे बालश्रम से मुक्त कराए गए हैं। इन बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद सीधे स्कूल भेजने के बजाय पहले इंटेंसिव केयर सेंटर लाया जाता है।

यहां बच्चों को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेल और काउंसलिंग की सुविधा दी जाती है। बच्चों के सुरक्षित आवागमन के लिए प्रशासन ने विशेष कैब की व्यवस्था भी की है। जिलाधिकारी खुद इस पूरे कार्यक्रम की नियमित और व्यक्तिगत मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

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“रुकना कोई विकल्प नहीं”

जिलाधिकारी ने बच्चों के अभिभावकों से अपील करते हुए साफ किया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भिक्षावृत्ति निवारण अभियान पूर्ण सेचुरेशन (लक्ष्य पूरा होने) तक जारी रहेगा और इसमें रुकना कोई विकल्प नहीं है। प्रशासन का यह मानवीय प्रयास अब ठोस नतीजों में बदल रहा है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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