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Dehradun : मनरेगा के स्वरूप और अंकिता भंडारी केस पर कांग्रेस का ‘हल्ला बोल’, दो महीने का रोडमैप तैयार

उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने देहरादून में सरकार पर मनरेगा का स्वरूप बदलने और मजदूरों के हक मारने का आरोप लगाया है। उन्होंने अंकिता भंडारी केस में न्याय और मनरेगा के नए नियमों के विरोध में 10 जनवरी से 29 फरवरी तक प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।

Published on: January 8, 2026 8:48 PM
Dehradun : मनरेगा के स्वरूप और अंकिता भंडारी केस पर कांग्रेस का 'हल्ला बोल', दो महीने का रोडमैप तैयार
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HIGHLIGHTS

  • मनरेगा में बदलाव: मांग-आधारित रोजगार को आपूर्ति-आधारित बनाकर अधिकारों को सीमित करने का आरोप।
  • मजदूरों पर असर: पीक खेती के समय 60 दिनों तक काम रोकने वाले नियम से मजदूरों की बार्गेनिंग पावर घटेगी।
  • आंदोलन की रूपरेखा: 10 जनवरी से प्रेस वार्ता, 11 को धरना और 12 जनवरी से पंचायत स्तर पर चौपाल लगेगी।
  • अंकिता भंडारी प्रकरण: कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग दोहराई।

Dehradun : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की मूल आत्मा को खत्म करने का आरोप लगाया है।

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देहरादून में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अब अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मनरेगा बचाने के लिए सड़कों पर उतरेगी।

मनरेगा: अधिकार से निर्भरता की ओर

कुमारी सैलजा ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ योजना का नाम बदलने की नहीं, बल्कि मजदूरों के कानूनी अधिकार बचाने की है। मनरेगा अब तक एक ‘मांग-आधारित’ कानून था, जहाँ सरकार काम देने के लिए बाध्य थी।

लेकिन नए नियमों के तहत इसे ‘आपूर्ति-आधारित’ बनाया जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि अब काम मिलना या न मिलना केंद्र द्वारा तय बजट पर निर्भर करेगा, न कि मजदूर की मांग पर।

उन्होंने चिंता जताई कि नए कानून में प्रधानों के अधिकार सीमित हो जाएंगे, जिससे सत्ता के विकेंद्रीकरण का ढांचा कमजोर होगा। पहले केंद्र श्रम लागत का 90% वहन करता था, लेकिन नए नियमों में अधिकांश राज्यों के लिए यह अनुपात 60:40 कर दिया गया है। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और वे काम देने में पीछे हटेंगे।

60 दिन काम रोकने के नियम पर सवाल

सैलजा ने एक गंभीर मुद्दे को उजागर करते हुए बताया कि नए कानून में ‘चरम कृषि मौसम’ के दौरान 60 दिनों तक मनरेगा का काम रोकने का प्रावधान है।

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सरकार का तर्क है कि इससे खेतों के लिए मजदूर उपलब्ध होंगे, लेकिन कांग्रेस का मानना है कि यह मजदूरों की ‘सौदेबाजी की शक्ति’ (Bargaining Power) को खत्म कर देगा और उन्हें फिर से जमींदारों पर निर्भर बना देगा। अब रोजगार की गारंटी के बजाय, ‘रोजगार न मिलने की गारंटी’ दी जा रही है।

10 जनवरी से चरणबद्ध आंदोलन

कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है:

  • तैयारी: कमियों को उजागर करने वाले ड्राफ्ट और पैम्फलेट स्थानीय भाषा में बांटे जाएंगे।
  • 10 जनवरी: पूरे प्रदेश में जिलेवार प्रेस कॉन्फ्रेंस।
  • 11 जनवरी: गांधी जी या बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन।
  • 12 जनवरी से 29 फरवरी: पंचायत स्तर पर चौपालों का आयोजन कर जनता को जागरूक किया जाएगा।

अंकिता भंडारी: ‘एक नहीं, कई अंकिता का सवाल’

प्रेस वार्ता में कुमारी सैलजा ने अंकिता भंडारी हत्याकांड पर आए नए खुलासों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस घटना से स्तब्ध है। यह लड़ाई अब सिर्फ एक अंकिता की नहीं, बल्कि कई बेटियों की सुरक्षा की है। कांग्रेस तब तक चुप नहीं बैठेगी जब तक सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की घोषणा नहीं हो जाती।

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इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व सीएम हरीश रावत, प्रीतम सिंह, गुरदीप सप्पल, करन माहरा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक और पदाधिकारी मौजूद रहे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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