Dehradun DM Savin Bansal Action : देहरादून में सरकारी काम में लेतलाली दो बड़े अधिकारियों को भारी पड़ गई है। जिलाधिकारी (डीएम) सविन बंसल ने मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) की सरकारी गाड़ियां जब्त कर ली हैं।
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मामला बरसात से पहले जर्जर स्कूलों की मरम्मत से जुड़ा है, जिसकी रिपोर्ट समय पर न मिलने से डीएम नाराज थे। अब आलम यह है कि शिक्षा विभाग के ये दोनों जिम्मेदार अफसर सरकारी बैठकों और निरीक्षण के लिए टैक्सी या कर्मचारियों से लिफ्ट मांगने को मजबूर हैं।
100 स्कूलों की सुरक्षा का था सवाल
दरअसल, मानसून आने वाला है और जिले के कई सरकारी स्कूल जर्जर हालत में हैं। डीएम सविन बंसल ने करीब दस दिन पहले शिक्षा विभाग से ऐसे स्कूलों की सूची और मरम्मत के बजट का एस्टीमेट मांगा था। जिले में कुल 1200 सरकारी स्कूल हैं।
जब अधिकारियों की गाड़ियां छीनी गईं, तब जाकर रिपोर्ट तैयार हुई। इस रिपोर्ट में सामने आया कि करीब 100 स्कूल ऐसे हैं जो पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं और फिलहाल दूसरी इमारतों में चल रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में देरी डीएम को नागवार गुजरी।
अफसरों की दलीलें और प्रोटोकॉल का पेंच
कार्रवाई के बाद अधिकारियों के बयान अलग-अलग आए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल का कहना है कि उन्हें गाड़ी जब्त होने का सटीक कारण नहीं पता, क्योंकि उन्होंने एक रिपोर्ट एडीएम को समय पर सौंप दी थी।
वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) प्रेमलाल भारती ने माना कि सूचना देने में देरी हुई, जिसके चलते वाहन जब्त किए गए। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि वीआईपी प्रोटोकॉल में गाड़ियों की कमी थी, इसलिए प्रशासन ने ये दोनों गाड़ियां वहां लगा दी हैं।
डीएम बंसल का ‘एक्शन मोड’
देहरादून का चार्ज संभालने के बाद से ही डीएम सविन बंसल जनता से जुड़े कार्यों में लापरवाही पर सख्त हैं। इससे पहले उन्होंने क्लेमनटाउन कैंट बोर्ड के सीईओ का वाहन जब्त किया था।
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वन निगम के अधिकारियों द्वारा आठ महीने तक पेड़ कटाई की अनुमति फाइल दबाने पर भी उन्होंने वन निगम के अफसरों, डीएलएम और आरएम को फटकार लगाते हुए वाहन जब्त करने के आदेश दिए थे। शिक्षा विभाग पर हुई इस ताजा कार्रवाई ने जिले के बाकी विभागों को भी कड़ा संदेश दिया है।



















