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Dehradun : लाखामण्डल में भ्रष्टाचार पर डीएम का डंडा, ऑडियो सबूत मिलते ही पटवारी जयलाल शर्मा निलंबित

देहरादून के लाखामण्डल में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर डीएम सविन बंसल ने पटवारी जयलाल शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ग्रामीणों ने पेनड्राइव में ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपकर पटवारी द्वारा गरीब किसानों से की जा रही अवैध वसूली का भंडाफोड़ किया था।

Published on: January 2, 2026 11:06 PM
Dehradun : लाखामण्डल में भ्रष्टाचार पर डीएम का डंडा, ऑडियो सबूत मिलते ही पटवारी जयलाल शर्मा निलंबित
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HIGHLIGHTS

  • ऑडियो साक्ष्य: ग्रामीणों ने डीएम को शपथ पत्र के साथ पेनड्राइव में रिकॉर्डिंग सौंपी थी।
  • गंभीर आरोप: दाखिल-खारिज और फर्जी विक्रय पत्र बनाने के लिए नकद व ऑनलाइन घूस लेने का आरोप।
  • जांच के आदेश: तहसीलदार विकासनगर को एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
  • कड़ी कार्रवाई: डीएम ने साफ किया कि भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति लागू रहेगी।

देहरादून : जिलाधिकारी सविन बंसल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए लाखामण्डल क्षेत्र के राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) जयलाल शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

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शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, पटवारी पर गरीब काश्तकारों और स्थानीय निवासियों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे थे। प्रशासन ने निलंबन अवधि के दौरान उन्हें तहसील कालसी स्थित रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय से संबद्ध कर दिया है।

पेनड्राइव ने खोली भ्रष्टाचार की पोल

लाखामण्डल और चकराता के निवासियों ने इस मामले में एकजुट होकर आवाज उठाई थी। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को सौंपे गए संयुक्त शिकायती पत्र के साथ एक पेनड्राइव भी दी, जिसमें ऑडियो साक्ष्य मौजूद थे। शपथ पत्र के जरिए आरोप लगाया गया कि पटवारी जयलाल शर्मा क्षेत्र में तैनाती के बाद से ही छोटे-बड़े सरकारी काम के बदले पैसों की मांग कर रहे थे।

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शिकायत के अनुसार, पटवारी द्वारा फर्जी विक्रय पत्र तैयार करने और दाखिल-खारिज जैसे जरूरी कामों के लिए भी खुलेआम रिश्वत ली जा रही थी। आरोप है कि वे न केवल नकद, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से भी धनराशि वसूल रहे थे। पीड़ितों में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के गरीब लोग और स्थानीय किसान शामिल थे।

एक महीने में पूरी होगी जांच

डीएम ने शिकायत मिलते ही मामले की प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें आरोप गंभीर और प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके आधार पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पटवारी को निलंबित करने का निर्णय लिया गया। मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा तहसीलदार विकासनगर को सौंपा गया है।

जिलाधिकारी ने जांच अधिकारी को सख्त निर्देश दिए हैं कि एक महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। निलंबन के दौरान आरोपी कर्मचारी को नियमों के तहत जीवन निर्वाह भत्ता (अर्द्ध औसत वेतन) और महंगाई भत्ता मिलेगा, बशर्ते वह किसी अन्य रोजगार में शामिल न हो।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि जिला प्रशासन भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के मामलों में ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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