चमोली : अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में 30 दिसंबर को हुए हादसे ने सिस्टम की नींद उड़ा दी है। निर्मात्री संस्था टीएचडीसी ने अब परियोजना की सुरक्षा व्यवस्थाओं को पूरी तरह खंगालने का फैसला किया है।
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भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि सुरंग के भीतर काम करने वाले श्रमिकों की जान दोबारा जोखिम में न पड़े।
एक महीने पहले आया था ऑपरेटर, अब नौकरी गई
हादसे के केंद्र में रही लोको ट्रेन को चलाने वाला ऑपरेटर एचसीसी (हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी) का कर्मचारी था। उसने केवल एक माह पहले ही इस परियोजना में अपनी ज्वाइनिंग दी थी। परियोजना प्रमुख अजय वर्मा ने स्पष्ट किया कि चालक की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जब तक मजिस्ट्रेटी जांच पूरी नहीं हो जाती, ऑपरेटर स्टेशन छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। प्रशासन की यह सख्ती बता रही है कि इस बार जवाबदेही तय होना निश्चित है।
जांच चलने तक सुरंग में सन्नाटा
सुरंग के भीतर फिलहाल काम पूरी तरह रोक दिया गया है। बृहस्पतिवार से चमोली जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने अपनी जांच शुरू कर दी है। पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने टीबीएम साइट का मौका मुआयना किया, वहीं एसडीएम चमोली राजकुमार पांडेय शुक्रवार को निरीक्षण करेंगे।
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साफ निर्देश हैं कि जब तक मजिस्ट्रेटी जांच चल रही है, सुरंग के भीतर टीबीएम और मैनुअल काम पूरी तरह बंद रहेगा। परियोजना की करीब 3 किलोमीटर सुरंग का निर्माण कार्य अभी शेष है, लेकिन सुरक्षा मानकों और एसओपी (SOP) के कड़ाई से पालन के बिना अब एक इंच भी खुदाई नहीं होगी।
घायलों की जिम्मेदारी कंपनी पर
हादसे के बाद अस्पताल का मंजर डराने वाला था। उस दिन 70 श्रमिक और कर्मी घायल हुए थे, जिनमें से प्राथमिक उपचार के बाद 61 को अस्पताल लाया गया था। राहत की बात यह है कि अब जिला अस्पताल में केवल पांच कार्मिक भर्ती हैं, बाकी सभी को छुट्टी दे दी गई है।
परियोजना प्रमुख ने भरोसा दिलाया है कि भर्ती कर्मियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा दी जा रही है और उनके इलाज का पूरा प्रबंधन टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड कर रही है। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में चूक अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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