Payal Pahnne Ke Niyam : भारतीय परंपरा में महिलाओं के सोलह शृंगार में पायल का विशेष स्थान है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शादीशुदा महिलाओं के लिए पायल पहनना बेहद शुभ माना जाता है।
यह केवल पैरों की खूबसूरती बढ़ाने वाला आभूषण नहीं है, बल्कि इसे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र में पायल पहनने के कुछ कड़े नियम बताए गए हैं, जिनका पालन न करने पर जीवन में आर्थिक और मानसिक संकट आ सकते हैं।
चांदी का संबंध सीधा चंद्रमा और मन से
पायल पहनने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन इसके लिए चांदी धातु को ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिष के अनुसार, चांदी का संबंध चंद्रमा से होता है।
चंद्रमा मन, भावनाओं और शीतलता का कारक है। जब कोई महिला चांदी की पायल पहनती है, तो उसका मन शांत रहता है और मानसिक तनाव कम होता है।
वैज्ञानिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी चांदी बेहद लाभकारी है। यह धातु शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है और ठंडक प्रदान करती है।
चांदी की पायल पैरों में घर्षण के माध्यम से शरीर की ऊर्जा को संतुलित करती है, जिससे पैरों में सूजन, दर्द और थकान जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह शरीर से नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर सकारात्मकता का संचार करती है।
सोना और लोहा पहनना क्यों है वर्जित?
शास्त्रों में स्पष्ट किया गया है कि पैरों में कभी भी लोहे, पीतल या किसी अन्य मिश्रित धातु की पायल नहीं पहननी चाहिए। इसके अलावा, सोने की पायल पहनना भी पूर्णतः वर्जित है। सोना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
इसे पैरों में पहनने से देवी लक्ष्मी का अपमान होता है, जिससे आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, हमेशा शुद्ध चांदी की पायल ही धारण करनी चाहिए।
टूटी पायल ला सकती है दुर्भाग्य
अक्सर महिलाएं पायल पुरानी होने या टूटने पर भी उसे पहनती रहती हैं, जिसे ज्योतिष में अशुभ माना गया है। टूटी हुई या खराब पायल जीवन में दुर्भाग्य ला सकती है।
ऐसी पायल नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे सौभाग्य में कमी आती है। यदि पायल कहीं से भी खंडित हो जाए, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए और उसके स्थान पर नई पायल धारण करनी चाहिए।
संतुलन के लिए दोनों पैरों में पहनना जरूरी
आजकल के फैशन में कई बार एक पैर में पायल पहनने का चलन देखा जाता है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह गलत है। एक पैर में पायल पहनने से शरीर और ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है।
इससे जीवन में नकारात्मकता बढ़ सकती है और पायल पहनने का शुभ फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए हमेशा दोनों पैरों में पायल पहननी चाहिए।
धारण करने की सही विधि
पायल को पहनने से पहले उसका शुद्धिकरण आवश्यक है। नई पायल को सबसे पहले गंगाजल से धोकर पवित्र करें। इसके बाद “ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें और फिर इसे धारण करें।
यह विधि वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।
Mirror Vastu Tips : घर में शीशा कहां लगाना शुभ है और कहां अशुभ, जानिए वास्तु के ये नियम



















