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Trump Trade War : भारत समेत 16 देशों के खिलाफ व्यापारिक जांच शुरू, लग सकता है भारी टैरिफ

ट्रंप प्रशासन ने भारत और चीन सहित 16 प्रमुख देशों के खिलाफ 'अनुचित' व्यापार नीतियों और अतिरिक्त उत्पादन को लेकर उच्च स्तरीय जांच शुरू की है। इस कदम से भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ और आर्थिक जुर्माने लगने का खतरा पैदा हो गया है।

Published On: मार्च 12, 2026 2:25 अपराह्न
Trump Trade War : भारत समेत 16 देशों के खिलाफ व्यापारिक जांच शुरू, लग सकता है भारी टैरिफ

HIGHLIGHTS

  • भारत, चीन और यूरोपीय संघ समेत 16 देशों की औद्योगिक क्षमता और उत्पादन की होगी जांच।
  • जबरन मजदूरी (Forced Labor) के आरोपों पर भी 60 देशों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की तैयारी।
  • आगामी गर्मियों तक नए टैरिफ लागू होने की संभावना, कनाडा को जांच के दायरे से रखा गया बाहर।

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बड़ा आक्रामक कदम उठाते हुए भारत सहित 16 प्रमुख देशों के खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है। ट्रंप प्रशासन इन देशों की व्यापारिक नीतियों (Trump Trade War) को ‘अनुचित’ मान रहा है और इसके जरिए भविष्य में अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आधार तैयार किया जा रहा है। अमेरिकी व्यापार जांच का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेशों को रद्द किए जाने के ठीक बाद आया है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन दो अलग-अलग स्तरों पर जांच कर रहा है। पहली जांच का मुख्य केंद्र इन देशों में जरूरत से ज्यादा औद्योगिक उत्पादन (Overcapacity) है, जो अमेरिकी बाजार को प्रभावित कर रहा है। दूसरी जांच ‘जबरन मजदूरी’ से तैयार सामानों के आयात पर केंद्रित है, जिसका असर ग्लोबल सप्लाई चैन पर पड़ सकता है।

इन देशों पर गिरेगी गाज

इस जांच के दायरे में भारत के अलावा चीन, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके साथ ही ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे को भी इस सूची में रखा गया है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने अपने पड़ोसी और दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार कनाडा को फिलहाल इस जांच से अलग रखा है।

जैमीसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगामी गर्मियों तक नए टैरिफ लागू किए जा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए अगर सख्त कदम उठाने पड़े, तो प्रशासन पीछे नहीं हटेगा। ग्रीर ने यह भी संकेत दिया कि अलग-अलग देशों की आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से जुर्माने की दरें भिन्न हो सकती हैं।

चीन और यूरोपीय संघ पर कड़ा रुख

अमेरिका ने विशेष रूप से चीन की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षमता पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की BYD जैसी कंपनियां अपनी घरेलू मांग से कहीं ज्यादा उत्पादन कर रही हैं और वैश्विक बाजारों में आक्रामक विस्तार कर रही हैं। वहीं, यूरोपीय संघ के तहत जर्मनी और आयरलैंड के बड़े व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) को भी अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती मान रहा है।

जबरन मजदूरी को लेकर होने वाली दूसरी जांच काफी व्यापक होने वाली है। इसमें करीब 60 देशों को शामिल किया जा सकता है। इससे पहले अमेरिका ने चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सामानों पर ‘उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत कार्रवाई की थी। अब इस कानून का दायरा बढ़ाते हुए अन्य देशों से होने वाले आयात की भी बारीकी से स्क्रूटनी की जाएगी।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यदि भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो स्टील, एल्युमीनियम और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में अहम मुलाकात होनी है। जानकारों का मानना है कि इस जांच का इस्तेमाल ट्रंप वार्ता की मेज पर दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।

Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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