Sawan Pradosh Vrat : सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान आने वाले प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस साल सावन में सोम प्रदोष और भौम प्रदोष का बेहद शुभ संयोग बन रहा है, जिसे शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में की गई शिव पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यदि आप भी सावन के प्रदोष व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो तिथियों और पूजा के समय की सही जानकारी होना जरूरी है।
सावन का पहला प्रदोष व्रत (सोम प्रदोष)

सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने से यह ‘सोम प्रदोष’ कहलाता है। सावन सोमवार और प्रदोष व्रत का एक साथ होना बेहद शुभ माना जाता है।
- त्रयोदशी तिथि की शुरुआत: 10 अगस्त, सुबह 8:00 बजे से
- तिथी का समापन: 11 अगस्त, सुबह 4:54 बजे
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 10 अगस्त, शाम 6:37 बजे से रात 8:48 बजे तक
सोम प्रदोष का व्रत मन की शांति, पारिवारिक सौहार्द और स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष रूप से रखा जाता है।
सावन का दूसरा प्रदोष व्रत (भौम प्रदोष)
सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026, मंगलवार को पड़ेगा। मंगलवार के दिन आने वाले प्रदोष को ‘भौम प्रदोष’ कहा जाता है।
- त्रयोदशी तिथि की शुरुआत: 25 अगस्त, सुबह 6:20 बजे से
- तिथी का समापन: 26 अगस्त, सुबह 7:59 बजे
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 25 अगस्त, शाम 6:24 बजे से रात 8:39 बजे तक
पुराणों में भौम प्रदोष का संबंध साहस, कर्ज से राहत और जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में सफलता से जोड़ा गया है।
प्रदोष काल में कैसे करें पूजा?

प्रदोष व्रत में शाम के समय की जाने वाली पूजा (प्रदोष काल) का ही मुख्य महत्व होता है। पूजा की सरल विधि इस प्रकार है:
सुबह का संकल्प: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और शिवजी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक विचार रखें।
अभिषेक: शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, गंगाजल और पंचामृत अर्पित करें।
सामग्री: बेलपत्र, धतूरा, आंकड़ा (आक) के फूल और सफेद चंदन चढ़ाएं।
मंत्र जाप: शाम के मुहूर्त में दीपक जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करना भी शुभ रहता है।
आहार: दिनभर फलाहार रखें और शाम की आरती के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।
क्यों खास माना जाता है सावन में प्रदोष?
स्कंद पुराण के अनुसार, प्रदोष काल के समय भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं। सावन के महीने में जब त्रयोदशी तिथि का संयोग बनता है, तो इस समय की गई शिव आराधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
सही मुहूर्त में नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।















