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सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक से पहले जान लें भद्रा का समय, इस वक्त करें शिव पूजा

सावन शिवरात्रि पर 11 अगस्त को सुबह से दोपहर तक भद्रा का साया रहेगा, लेकिन शास्त्रों के अनुसार शिव पूजा में इसका दोष नहीं लगता। भक्त पूरे दिन शुभ मुहूर्तों में महादेव का जलाभिषेक कर सकते हैं।

Published On: August 9, 2026 9:37 AM
Sawan Shivratri Puja Muhurat

Sawan Shivratri Puja Muhurat : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान आने वाली सावन शिवरात्रि का धार्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व है।

मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर सच्चे मन से जल चढ़ाने और व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस साल सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी।

इस दिन सुबह से ही भद्रा काल लग रहा है, जिससे कई लोगों के मन में पूजा के समय को लेकर संशय है। आइए समझते हैं कि भद्रा का शिव पूजा पर क्या असर होगा और जलाभिषेक के सटीक मुहूर्त क्या हैं।

तिथियों का गणित और उदयातिथि

पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4:43 बजे से शुरू हो रही है। यह तिथि 12 अगस्त को तड़के 1:51 बजे समाप्त होगी।

उदयातिथि और निशिता काल के संयोग के कारण सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

क्या भद्रा काल में जल चढ़ाना सही है?

11 अगस्त को सुबह से ही भद्रा काल शुरू हो जाएगा, जो दोपहर 3:22 बजे तक रहेगा। सामान्यतः भद्रा में शुभ कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की पूजा में भद्रा का दोष लागू नहीं होता।

इसलिए भक्त बिना किसी संशय के सावन शिवरात्रि पर पूरे दिन जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जलाभिषेक के मुख्य शुभ मुहूर्त

दिनभर पूजा के अलावा कुछ विशेष शुभ समय भी हैं जिनमें जल चढ़ाना बेहद फलदायी माना जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:23 बजे से 6:00 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से 12:58 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: रात 9:13 बजे से 9:32 बजे तक
  • निशिता काल: रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक (12 अगस्त)

चार प्रहर की पूजा की टाइमिंग

सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा करने का विशेष विधान है। जो भक्त रातभर जागकर आराधना करते हैं, वे इन समयों का ध्यान रख सकते हैं:

  • पहला प्रहर: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
  • दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
  • तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से तड़के 3:07 बजे तक
  • चौथा प्रहर: 12 अगस्त तड़के 3:07 बजे से सुबह 5:49 बजे तक

सरल पूजा विधि और जरूरी सावधानियां

सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। मंदिर या घर पर शिवलिंग पर सबसे पहले जल, दूध, गंगाजल, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें।

इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और आरती उतारें।

पूजा के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • शिवलिंग पर तुलसी की पत्तियां, हल्दी और सिंदूर न चढ़ाएं।
  • जो बेलपत्र आप अर्पित कर रहे हैं, वह कटा-फटा या सूखा नहीं होना चाहिए।
  • अगर आपके पास सामग्री कम है, तो केवल शुद्ध जल और बेलपत्र से भी निष्काम भाव से पूजा की जा सकती है।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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