देहरादून : पुलिस ने एंजेल चकमा हत्याकांड के फरार मुख्य आरोपी यज्ञ राज अवस्थी की तलाश में पूरी ताकत झोंक दी है। एसएसपी अजय सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर घोषित इनाम की राशि 25 हजार से बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये कर दी है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी नेपाल भागने की फिराक में है या सीमावर्ती इलाकों में छिपा हो सकता है, जिसके चलते बॉर्डर पर भी निगरानी कड़ी कर दी गई है।
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एसआईटी संभालेगी जांच की कमान
घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए एसएसपी ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक (एसपी) विकासनगर करेंगे। मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान एसएसपी ने बताया कि पुलिस हर हाल में मुख्य आरोपी को जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाएगी।
9 दिसंबर को सेलाकुई में मामूली विवाद के बाद त्रिपुरा निवासी छात्र एंजेल चकमा पर चाकू और कड़े से जानलेवा हमला किया गया था। इलाज के दौरान 26 दिसंबर को ग्राफिक एरा अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।
5 आरोपी जेल में, मुख्य आरोपी की तलाश तेज
पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद छह लोगों को इस वारदात में शामिल पाया। इनमें से पांच आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। हालांकि, मुख्य आरोपी यज्ञ राज अवस्थी, जो मूल रूप से नेपाल के कंचनपुर का रहने वाला है, अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है।
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उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के सिर और कान के पास गहरी चोट लगने की पुष्टि हुई है, जो मौत का कारण बनी।
पीड़ित परिवार को मिली आर्थिक सहायता
प्रशासन ने इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई की है। पीड़ित परिवार द्वारा उपलब्ध कराए गए जाति प्रमाण पत्र के आधार पर केस में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं।
एसएसपी ने जानकारी दी कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिला समाज कल्याण विभाग ने 29 दिसंबर को पीड़ित परिवार को 4 लाख 12 हजार 500 रुपये की पहली किस्त आर्थिक सहायता के रूप में भेज दी है। पुलिस ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।
नस्लभेदी हमले की बात से पुलिस का इनकार
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर उठ रहे नस्लभेदी सवालों पर भी पुलिस ने स्थिति साफ की है। एसएसपी अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में नस्लभेदी टिप्पणी या भेदभाव का कोई भी साक्ष्य सामने नहीं आया है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपियों के समूह में भी विविधता है; मुख्य आरोपी नेपाली मूल का है, जबकि एक अन्य आरोपी मणिपुर का ही रहने वाला है।
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पीड़ित पक्ष की तहरीर में भी ऐसी किसी टिप्पणी का जिक्र नहीं था। पुलिस का कहना है कि अगर भविष्य में ऐसा कोई साक्ष्य मिलता है, तो जांच की दिशा उस ओर भी मोड़ी जाएगी।













