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Uttarakhand : परिवार रजिस्टर में 22 साल का रिकॉर्ड खंगालेगी धामी सरकार, जांच के आदेश

उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर में धांधली रोकने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने 2003 से अब तक के रिकॉर्ड की जांच के आदेश दिए हैं। जनसांख्यिकीय बदलाव की आशंका के बीच सभी रजिस्टरों को डीएम की अभिरक्षा में रखने और फर्जी नाम दर्ज कराने वालों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया

Published on: January 3, 2026 7:00 PM
Uttarakhand : परिवार रजिस्टर में 22 साल का रिकॉर्ड खंगालेगी धामी सरकार, जांच के आदेश
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HIGHLIGHTS

  • सख्त कार्रवाई: प्रदेश के सभी जिलों में डीएम अपने कब्जे में लेंगे परिवार रजिस्टर, सीडीओ और एडीएम स्तर के अधिकारी करेंगे जांच।
  • जांच का दायरा: वर्ष 2003 से लेकर अब तक हुई सभी प्रविष्टियों की गहन पड़ताल होगी।
  • बड़ा कारण: मैदानी और सीमावर्ती जिलों में अवैध बसावट और जनसांख्यिकीय असंतुलन की आशंका।
  • आंकड़े: 2025 में 2.66 लाख नए आवेदन आए, जिनमें से 5,400 से अधिक संदिग्ध होने पर निरस्त किए गए।
  • नई व्यवस्था: नियमों में संशोधन कर मामला कैबिनेट में लाया जाएगा, फर्जीवाड़ा करने वालों पर कानूनी केस दर्ज होगा।

देहरादून : उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर में हो रही गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्यभर में परिवार रजिस्टरों की व्यापक और समयबद्ध जांच की जाए।

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सरकार ने तय किया है कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, ताकि पिछले 22 सालों में हुई किसी भी तरह की अनियमितता को पकड़ा जा सके।

डीएम की निगरानी में सुरक्षित होंगे दस्तावेज

जांच में पारदर्शिता लाने और सबूतों से छेड़छाड़ रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने आदेश दिया कि सभी जिलों में मौजूद परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल जिलाधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखवाई जाएं। अब इन दस्तावेजों की गहन जांच सीडीओ (CDO) या एडीएम (ADM) स्तर के अधिकारी करेंगे। सरकार का मकसद साफ है कि सरकारी अभिलेखों में किसी भी तरह की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डेमोग्राफी और अवैध बसावट पर नजर

बैठक में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि बीते कुछ सालों में राज्य के मैदानी और सीमावर्ती जिलों के ग्रामीण इलाकों में अवैध बसावट के जरिए परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराए गए हैं। इससे प्रदेश के जनसांख्यिकीय संतुलन (Demography) पर असर पड़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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5 हजार से ज्यादा संदिग्ध आवेदन निरस्त

पंचायती राज विभाग के आंकड़ों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। विभाग ने जानकारी दी कि 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेशभर में नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन आए। इनमें से 2,60,337 स्वीकार किए गए, जबकि 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन और अधूरे दस्तावेजों के कारण खारिज कर दिए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त आवेदनों की यह संख्या बड़े पैमाने पर फर्जी प्रविष्टियों की कोशिश की ओर इशारा करती है।

नियमों में होगा बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि परिवार रजिस्टर का काम पंचायत राज नियमावली, 1970 के तहत होता है। अभी नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) और अपील का अधिकार एसडीएम के पास है। सरकार अब इस प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में संशोधन की तैयारी कर रही है। भविष्य में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को एक स्पष्ट नीति के तहत नियंत्रित कर प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।

बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते और निदेशक पंचायती राज निधि यादव मौजूद रहे।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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