Chakrata Wedding Rules : शादियों के सीजन की शुरुआत 14 जनवरी से हो रही है, लेकिन उससे ठीक पहले देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में एक बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला है।
चकराता के खत सिलगांव में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि अब शादियों में दिखावे और फिजूलखर्ची की कोई जगह नहीं होगी। सदर स्याणा तुलसी राम शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया है कि शादी में फास्टफूड, बीयर और डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
वेडिंग प्वाइंट संस्कृति पर रोक
ग्रामीणों ने तय किया है कि खत (गांवों का समूह) की कोई भी शादी वेडिंग प्वाइंट में नहीं की जाएगी। हालांकि, पहले से तय शादियों को देखते हुए यह नियम 30 जून 2026 के बाद पूर्ण रूप से लागू होगा। इस तारीख के बाद अगर कोई परिवार वेडिंग प्वाइंट में शादी या भोज का आयोजन करता है, तो गांव का कोई भी व्यक्ति उसमें शामिल नहीं होगा। समारोह में केवल संबंधित परिवार के सदस्य ही हिस्सा ले सकेंगे।
उल्लंघन करने पर एक लाख का दंड
नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। अगर कोई परिवार इन फैसलों को नहीं मानता है, तो उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा।
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इतना ही नहीं, अगर कोई दूसरा गांव वेडिंग प्वाइंट में आयोजित ऐसी शादी में शामिल होकर नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस गांव से भी खत द्वारा 50 हजार रुपये बतौर जुर्माना वसूला जाएगा।
महिलाओं के लिए गहनों की सीमा तय
बैठक में सबसे अहम फैसला महिलाओं के आभूषणों को लेकर हुआ। शादी समारोह, बिस्सू मेला या खत के किसी भी सामूहिक त्योहार में महिलाएं अब सीमित गहने ही पहनेंगी। अनुमति केवल कान के झुमके (या मुंगल), नाक की फुली, मंगलसूत्र, पैर की पायल और अंगूठी की होगी। इसके अलावा शादी में ‘रईणी भोज’ के दौरान महिलाओं को नकद पैसा नहीं दिया जाएगा, उन्हें शगुन के तौर पर सिर्फ आधा किलो मिठाई दी जाएगी।
सिर्फ पहाड़ी वाद्य यंत्र और 5 बर्तन
जौनसारी रीति-रिवाज से होने वाले ‘झोझोड़ा’ (पाईता) विवाह में भी सादगी बरती जाएगी। दुल्हन को उपहार स्वरूप सिर्फ पांच चीजें दी जाएंगी- बटवा, परात, कटोरा, थाली, संदूक और बिस्तर। डीजे पर पूरी तरह रोक रहेगी और सिर्फ पारंपरिक पहाड़ी बैंड बाजे की अनुमति होगी। मामा पक्ष की ओर से भी लेन-देन को सीमित करते हुए सिर्फ एक बकरा देने और एक बकरा लेने का नियम बनाया गया है।
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