Jagran Forum Dehradun : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज देहरादून में ‘जागरण फोरम’ का उद्घाटन किया। यह आयोजन उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने देवभूमि को त्याग, तपस्या और राष्ट्र सेवा का प्रतीक बताया और राज्य के लोगों को रजत जयंती वर्ष की बधाई दी।
सांसद के तौर पर जुड़ी यादें
उपराष्ट्रपति ने राज्य निर्माण की प्रक्रिया से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब उत्तराखंड के गठन का विधेयक लोकसभा में आया था, तब वे सदन के सदस्य थे।
उन्होंने उस समय राज्य के गठन के पक्ष में मतदान किया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों की लंबी आकांक्षाओं का लोकतांत्रिक परिणाम था, जो भारत की संघीय व्यवस्था की ताकत को दर्शाता है।
सीमांत गांव: अंतिम नहीं, देश का ‘पहला’ प्रहरी
राज्य की सामरिक महत्ता पर चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यहां के सीमावर्ती गांव महज अंतिम चौकियां नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए उन्होंने माणा गांव का उदाहरण दिया और कहा कि ये गांव देश की ताकत, विरासत और लचीलेपन की ‘पहली पंक्ति’ हैं।
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उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य के योगदान की सराहना की और कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में यहां के अधिकारियों और जवानों की बड़ी संख्या गर्व का विषय है।
जीडीपी के साथ पर्यावरण का अनूठा मॉडल
विकास और पर्यावरण के संतुलन पर उपराष्ट्रपति ने राज्य सरकार की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सड़क, रेल और एयर कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व काम हुआ है।
Vice-President of India, Shri C. P. Radhakrishnan, today inaugurated the Jagran Forum in Dehradun, organised to mark 25 years of Uttarakhand’s statehood.
Highlighting the State’s strategic, spiritual and developmental significance, he said Devbhoomi Uttarakhand embodies Satyam,… pic.twitter.com/Ai54FVzUob
— Vice-President of India (@VPIndia) January 17, 2026
विशेष रूप से उन्होंने उत्तराखंड द्वारा ‘ग्रॉस एनवायरनमेंटल प्रोडक्ट’ (GEP) की अवधारणा को लागू करने की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जीडीपी के साथ-साथ जीईपी को महत्व देने वाला यह देश का पहला राज्य है। यहां के ग्लेशियर, नदियां और जंगल न केवल राज्य को, बल्कि देश के बड़े हिस्से को जीवन देते हैं। सौर ऊर्जा और ग्रीन डेवलपमेंट में राज्य के प्रयास सराहनीय हैं।
मीडिया से विशेष आग्रह: सकारात्मकता को दें जगह
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने एक विशेष आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मीडिया जनता और सत्ता के बीच का सेतु है।
उन्होंने अखबारों और मीडिया संस्थानों से अपील की कि वे नियमित रूप से कम से कम दो पेज सकारात्मक और विकासोन्मुखी खबरों के लिए समर्पित करें। उनका मानना है कि युवाओं के बीच रचनात्मक कहानियों का प्रसार उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
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कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि जागरण फोरम के विचार-विमर्श से राज्य की प्रगति के लिए नए विचार निकलेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दैनिक जागरण समूह के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।



















