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Uttarakhand : 1707 करोड़ मंजूर, अब 184 गांवों तक पहुंचेगी पक्की सड़क

उत्तराखंड में 1707 करोड़ की लागत से 184 नई सड़कों का निर्माण जल्द शुरू होगा। कम आबादी वाले 6000 गांवों को भी सड़क से जोड़ने के लिए सरकार ने विशेष 'क्ल्सटर प्लान' तैयार किया है।

Published on: January 2, 2026 2:14 PM
Uttarakhand : 1707 करोड़ मंजूर, अब 184 गांवों तक पहुंचेगी पक्की सड़क
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HIGHLIGHTS

  • पीएम ग्राम सड़क योजना (IV) के पहले चरण में 184 सड़कों (1228 किमी) को मंजूरी मिली।
  • अगले चरण के लिए 203 सड़कों की डीपीआर तैयार, लागत करीब 1033 करोड़ होगी।
  • 250 से कम आबादी वाले गांवों को 'क्लस्टर' बनाकर सड़क सुविधा दी जाएगी।
  • कच्ची और खस्ताहाल सड़कों को पक्का करने का काम भी प्राथमिकता पर होगा।

देहरादून : पहाड़ के दूरदराज गांवों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में पीएम ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के तहत सड़कों के जाल को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रदेश की 184 सड़कों के निर्माण के लिए 1707 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। सिर्फ नई सड़कें ही नहीं, बल्कि सालों से सड़क की आस लगाए बैठे कम आबादी वाले गांवों के लिए भी विभाग ने एक नया रास्ता खोज निकाला है।

पहले चरण में 1228 किलोमीटर का रोड नेटवर्क

सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि केंद्र की मंजूरी मिलते ही राज्य सरकार ने काम शुरू कर दिया है। स्वीकृत योजना के तहत कुल 1228 किलोमीटर लंबी 184 सड़कें बनाई जाएंगी। इन पर करीब 1700 करोड़ रुपये खर्च होंगे। विभाग का लक्ष्य है कि टेंडर प्रक्रिया तुरंत निपटाकर निर्माण कार्य को जमीन पर उतारा जाए।

प्रशासन ने इसके साथ ही दूसरे चरण की तैयारी भी पूरी कर ली है। दूसरे चरण में 203 और सड़कों की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार है, जिस पर 1033 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसका प्रस्ताव भी जल्द केंद्र को भेजा जाएगा।

6000 गांवों के लिए ‘क्लस्टर’ वाला समाधान

उत्तराखंड के करीब 6000 गांव ऐसे हैं, जो पीएमजीएसवाई के मानकों से बाहर थे। इसका कारण इन गांवों की आबादी 250 से कम होना था। योजना के नियमों के मुताबिक, 250 से कम जनसंख्या वाली बसावटों को सड़क से जोड़ने का प्रावधान नहीं था।

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सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि इस समस्या को सुलझाने के लिए विभाग ने ‘क्लस्टर बेस्ड सॉल्यूशन’ निकाला है। अब आस-पास की छोटी-छोटी बसावटों को मिलाकर एक क्लस्टर बनाया जाएगा। इससे संयुक्त आबादी 250 के मानक को पूरा कर लेगी और इन गांवों तक भी पक्की सड़क पहुंच सकेगी।

कच्ची सड़कों का होगा कायाकल्प

सरकार का फोकस सिर्फ नई सड़कों पर ही नहीं, बल्कि पुरानी सड़कों को सुधारने पर भी है। कई गांवों में सड़कें तो हैं, लेकिन वे कच्ची हैं या उनकी हालत बेहद खस्ता है। अधिकारियों के मुताबिक, पीएमजीएसवाई के इस चरण में ऐसी सड़कों को अपग्रेड कर उत्तम गुणवत्ता वाली पक्की सड़कों में बदला जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि जिन गांवों में संपर्क मार्ग खराब हैं, उन्हें मुख्य धारा से जोड़ना प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।

अब तक का सफर

पीएमजीएसवाई के पिछले तीन चरणों में प्रदेश की हजारों बसावटों को कनेक्टिविटी मिली है। पहले चरण (PMGSY-I) में 10 हजार करोड़ की लागत से 19,358 किलोमीटर सड़कें बनीं, जिससे 1860 बसावटें जुड़ीं। वहीं, दूसरे और तीसरे चरण में सड़कों के उच्चीकरण (Upgradation) पर जोर दिया गया। अब चौथे चरण में कनेक्टिविटी से छूटे हुए दुर्गम इलाकों को कवर करने की योजना है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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