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Sawan Pradosh Vrat Puja : भगवान शिव की ऐसे करें पूजा, एक प्रदोष में मिल सकता है 24 प्रदोष का फल

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Mon, 10 Aug 2026 09:28 AM IST

सोम प्रदोष व्रत के अवसर पर शिव मंदिर में जल अर्पित करने और दीपक जलाने से सालभर के सभी प्रदोष व्रतों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। जानिए पूजा का सटीक समय, संकल्प विधि और पारण का सही नियम।

Sawan Pradosh Vrat Puja

Sawan Pradosh Vrat Puja : हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है।

जब त्रयोदशी तिथि सोमवार को पड़ती है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल में की गई शिव पूजा से जीवन के मानसिक तनाव दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

शास्त्रों में पूरे साल में आने वाले 24 प्रदोष व्रतों का अलग-अलग महत्व बताया गया है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति सालभर के सभी व्रतों का नियमपूर्वक पालन न कर पाए, तो सोम प्रदोष के दिन एक विशेष उपाय करके पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त कर सकता है।

एक प्रदोष से कैसे मिलेगा 24 व्रतों का फल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में एक लोटा साफ जल और एक घी का दीपक लेकर शिव मंदिर जाएं।

सबसे पहले शिवलिंग पर भक्तिभाव से जल अर्पित करें और हाथों से शिवलिंग का स्पर्श करते हुए महादेव का ध्यान करें।

इसके बाद मंदिर में भगवान शिव के समक्ष घी का दीपक जलाएं। माना जाता है कि इस सरल विधि से पूरे साल के 24 प्रदोष व्रतों के समान फल और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और समय

त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त को तड़के 04:30 बजे से शुरू हो चुकी है, जो 11 अगस्त को रात 01:24 बजे तक रहेगी।

  • प्रदोष पूजा का समय: रात 09:15 बजे से रात 11:07 बजे तक
  • पूजा की कुल अवधि: 1 घंटा 53 मिनट

संकल्प और पूजा की सरल विधि

व्रत की शुरुआत सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके करें। स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की प्रतिमा के सामने बैठें और हाथ में जल व अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।

दिनभर मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। शाम को प्रदोष काल के समय पुनः स्नान या हाथ-पैर धोकर मंदिर जाएं और जलाभिषेक के साथ बेलपत्र, धतूरा व फल अर्पित करें।

सोम प्रदोष व्रत के लाभ और पारण समय

सोमवार के दिन पड़ने के कारण यह व्रत मानसिक शांति, वैवाहिक जीवन में मधुरता और पारिवारिक समृद्धि देने वाला माना जाता है।

यह व्रत कुंडली में चंद्रमा के नकारात्मक प्रभाव को भी शांत करता है।

व्रत का पारण अगले दिन यानी 11 अगस्त 2026, मंगलवार को सुबह 05:47 बजे सूर्योदय के बाद किया जाएगा।

प्रदोष का व्रत पूरे दिन और रात तक रखा जाता है, इसलिए सूर्योदय के पश्चात ही सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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