Sawan Shivratri Jalabhishek Muhurat : सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली सावन शिवरात्रि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है।
इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने और कांवड़ का जल अर्पित करने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
हालांकि इस साल 11 अगस्त को पड़ने वाली सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहने वाला है, जिससे श्रद्धालुओं के मन में समय को लेकर कुछ सवाल हैं।

सही मुहूर्त में किया गया पूजन और जलाभिषेक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। आइए जानते हैं कि भद्रा का समय क्या रहेगा और किस मुहूर्त में जल चढ़ाना सबसे उत्तम होगा।
क्या भद्रा में कर सकेंगे जलाभिषेक?
पंचांग के अनुसार, सावन शिवरात्रि के दिन सुबह 05 बजकर 58 मिनट से भद्रा प्रारंभ हो जाएगी, जो दोपहर 03 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। इस भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर है।
शास्त्रों में माना जाता है कि जब भद्रा पृथ्वी पर होती है, तो उस दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों की मनाही होती है।
हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल का ध्यान रखते हुए शुभ चौघड़िया या दिन के विशेष शुभ मुहूर्तों (जैसे ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त) में शिवलिंग पर जल अर्पित किया जा सकता है।
चतुर्दशी तिथि और जलाभिषेक के मुख्य मुहूर्त
सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 04 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त की देर रात 01 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:23 बजे से सुबह 06:00 बजे तक (सुबह की शुरुआत में जल अर्पण के लिए उत्तम)
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 09:13 बजे से रात 09:32 बजे तक
- निशिता काल (मध्यरात्रि पूजन): रात 12:05 बजे से रात 12:48 बजे तक (12 अगस्त की रात)
चार प्रहर की पूजा का समय
सावन शिवरात्रि पर रात्रि के चार प्रहर में महादेव की पूजा का खास विधान है। जो श्रद्धालु पूरे नियम से चार प्रहर का पूजन करना चाहते हैं, वे इस समय तालिका का ध्यान रख सकते हैं:

- प्रथम प्रहर: शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
- द्वितीय प्रहर: रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
- तृतीय प्रहर: रात 12:26 बजे से प्रातः 03:07 बजे तक (12 अगस्त)
- चतुर्थ प्रहर: प्रातः 03:07 बजे से सुबह 05:48 बजे तक (12 अगस्त)
कांवड़ यात्रा का समापन भी इसी दिन जलाभिषेक के साथ होता है। यदि आप भी मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो कोशिश करें कि बताए गए शुभ मुहूर्तों के भीतर ही जल अर्पित करें और नियमपूर्वक पूजन संपन्न करें।












