Virat Kohli : टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली के करियर को लेकर बड़ा बयान दिया है. जहां एक तरफ विराट वनडे मुकाबलों में पुरानी लय में लौट आए हैं, वहीं मांजरेकर उनके टेस्ट क्रिकेट छोड़ने के फैसले से खुश नहीं हैं.
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उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए कहा कि कोहली का वनडे खेलना निराशाजनक है, क्योंकि उन्होंने खेल का सबसे आसान रास्ता चुना है.
‘फैब 4’ में पिछड़ने का मलाल
संजय मांजरेकर ने इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट में ‘फैब 4’ (विराट कोहली, जो रूट, स्टीव स्मिथ, केन विलियमसन) का जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि जैसे-जैसे जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, उनका ध्यान विराट कोहली की ओर जाता है.
मांजरेकर के मुताबिक, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रूट, स्मिथ और विलियमसन अभी भी टेस्ट फॉर्मेट में अपना जलवा बिखेर रहे हैं, जबकि विराट ने मैदान छोड़ दिया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संन्यास से पहले के पांच सालों में विराट का टेस्ट औसत गिरकर 31 रह गया था. मांजरेकर का मानना है कि विराट ने यह जानने की पूरी कोशिश नहीं की कि आखिर यह गिरावट क्यों आई.
वनडे को बताया सबसे ‘आसान फॉर्मेट’
मांजरेकर ने विराट के वनडे खेलने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर विराट हर फॉर्मेट से संन्यास ले लेते तो बात अलग थी. लेकिन उन्होंने सिर्फ वनडे को चुना, जो एक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के लिए सबसे आसान फॉर्मेट होता है.
मांजरेकर ने कहा कि असली परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में होती है और टी20 की अपनी चुनौतियां हैं. ऐसे में विराट का आसान विकल्प चुनना उन्हें निराश करता है.
घरेलू क्रिकेट में पसीना बहाने की सलाह
मांजरेकर का मानना है कि विराट कोहली की फिटनेस बेहतरीन है और वे अभी भी वापसी कर सकते थे. अगर उन्हें टीम इंडिया से बाहर भी किया जाता, तो उनके पास विकल्प मौजूद थे.
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संजय मांजरेकर ने सुझाव दिया कि विराट को फर्स्ट क्लास क्रिकेट, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट या भारत में घरेलू मैच खेलने चाहिए थे. वे वहां मेहनत कर एक और बार टेस्ट में वापसी की कोशिश कर सकते थे.
आंकड़ों पर एक नजर स्रोत के अनुसार, विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैचों में 46.85 के औसत के साथ अपने टेस्ट करियर का अंत किया. साल 2020 तक वे फैब 4 में सबसे आगे थे, लेकिन बाद में उनकी फॉर्म में गिरावट आई और पिछले पांच सालों में वे 30 के औसत से ही रन बना सके.












