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US Iran War Update : ट्रंप को ईरान का दोटूक जवाब, पाकिस्तान में बातचीत से इनकार

ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराते हुए दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। पाकिस्तान, कतर और तुर्की द्वारा की जा रही शांति बहाली की मध्यस्थता पूरी तरह विफल साबित हुई है।

Published On: April 4, 2026 12:26 PM
US Iran War Update : ट्रंप को ईरान का दोटूक जवाब, पाकिस्तान में बातचीत से इनकार

HIGHLIGHTS

  • ईरान ने पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने और शांति वार्ता करने से साफ मना किया।
  • अमेरिकी वायुसेना के F-15 स्ट्राइक ईगल और A-10 थंडरबोल्ट विमानों को ईरान ने बनाया निशाना।
  • 36 दिनों से जारी इस भीषण युद्ध में अब तक 1900 से ज्यादा ईरानी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं।

तेहरान, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मध्य पूर्व में बारूद की गंध और गहरी हो गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 48 घंटे के युद्धविराम को सिरे से खारिज कर दिया है।

पाकिस्तान की जमीन पर होने वाली संभावित बातचीत पर पानी फेरते हुए ईरान ने कड़ा रुख अपनाया और अमेरिकी अधिकारियों से मिलने तक से इनकार कर दिया। यह टकराव केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईरान ने अमेरिकी वायुसेना को सैन्य मोर्चे पर भी सीधी चुनौती दी है।

ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे अमेरिकी लड़ाकू विमानों पर हमला बोलकर युद्ध को और आक्रामक मोड़ दे दिया है। जानकारी के मुताबिक, ईरान ने पहले अमेरिकी वायुसेना के शक्तिशाली F-15 स्ट्राइक ईगल को मार गिराया और उसके तुरंत बाद होर्मुज स्ट्रेट के पास ‘टैंक किलर’ कहे जाने वाले A-10 थंडरबोल्ट को भी ढेर कर दिया। इन हमलों के जरिए तेहरान ने वाशिंगटन को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।

शांति की उम्मीद लगाए बैठे मध्यस्थ देशों को भी करारा झटका लगा है। पाकिस्तान, कतर और तुर्की की त्रिकोणीय कोशिशें ईरान के अडिग रवैये के आगे नाकाम रहीं। अमेरिका ने 2 अप्रैल को एक मध्यस्थ के जरिए सीजफायर का 15 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था, जिसे ईरान ने अपमानजनक करार देते हुए ठुकरा दिया। अब कतर और तुर्की ने दोहा या इस्तांबुल में नई वार्ता का विकल्प खुला रखा है, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए इसकी संभावना क्षीण नजर आ रही है।

युद्ध की शर्तों पर दोनों देश धुर विरोधी बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु ठिकाने स्थायी रूप से बंद करे, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करे और तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल दे।

इसके बदले में ट्रंप प्रशासन ने प्रतिबंधों में ढील देने का लालच दिया था। वहीं, ईरान की अपनी 5 कड़ी शर्तें हैं, जिनमें मध्य पूर्व से अमेरिकी सैन्य ठिकानों की पूर्ण वापसी, युद्ध के नुकसान का मुआवजा और भविष्य में हमले न करने की लिखित गारंटी शामिल है।

इस 36 दिवसीय युद्ध का मानवीय और आर्थिक परिणाम बेहद भयावह रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुई इस भीषण जंग में ईरान के 1900 से अधिक सैनिक शहीद हो चुके हैं, जबकि अमेरिका के 13 और इजराइल के 19 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। लेबनान में हिजबुल्लाह पर हुए हमलों ने 1300 से अधिक लोगों की जान ली है और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।

शुक्रवार रात ईरान ने कुवैत की बड़ी तेल रिफाइनरी और वाटर प्लांट को निशाना बनाकर यह जता दिया कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी ठप करने की ताकत रखता है।

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Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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