ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

Benefits Of Buttermilk : सिर्फ पानी नहीं, बाहर का खाना खाने के बाद छाछ पीना है ज्यादा फायदेमंद, जानें क्यों

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rama Pun Updated Thu, 19 Feb 2026 03:57 PM IST

बाहर का भोजन करने के बाद अक्सर लोगों को सामान्य से अधिक प्यास और भारीपन महसूस होता है। इसका मुख्य कारण रेस्टोरेंट के खाने में मौजूद अत्यधिक सोडियम, तेल और प्रोसेस्ड सामग्री है जो शरीर के तरल संतुलन को प्रभावित करती है।

Benefits Of Buttermilk

मुख्य बातें

  • बाहर के खाने में स्वाद और संरक्षण के लिए नमक (सोडियम) की मात्रा घर के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है।
  • अधिक सोडियम शरीर की कोशिकाओं से पानी सोखता है, जिससे मस्तिष्क को बार-बार प्यास लगने के संकेत मिलते हैं।
  • भारी तेल और प्रोसेस्ड आटे को पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त हाइड्रेशन की जरूरत पड़ती है।
  • प्रोटीन से भरपूर या भारी भोजन को तोड़ने की प्रक्रिया में शरीर अधिक फ्लुइड्स का इस्तेमाल करता है।
  • सादे पानी के अलावा छाछ का सेवन इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाने और प्यास बुझाने में अधिक प्रभावी है।

Benefits Of Buttermilk : घर का बना ताजा और संतुलित भोजन जहां हमारे शरीर को दिनभर के काम के लिए ऊर्जा देता है, वहीं बाहर का खाना अक्सर सुस्ती, भारीपन और बार-बार प्यास लगने की वजह बनता है। आपने भी महसूस किया होगा कि रेस्टोरेंट या ढाबे का खाना खाने के बाद पानी पीने की इच्छा अचानक बढ़ जाती है।

इसके पीछे की वजह सिर्फ खाने का चटपटा स्वाद नहीं है, बल्कि उस भोजन को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले तत्व और उनकी बनावट भी जिम्मेदार है। विज्ञान के नजरिए से देखें तो इसके कई ठोस कारण सामने आते हैं।

सोडियम और नमक का गणित

घर के खाने की तुलना में बाहर मिलने वाले भोजन में नमक यानी सोडियम की मात्रा काफी अधिक होती है। असल में स्वाद को बढ़ाने और भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रोसेस्ड आटे, विभिन्न सॉस और मसालों में अतिरिक्त नमक मिलाया जाता है।

जब हम ज्यादा सोडियम वाला खाना खाते हैं, तो यह शरीर में तरल पदार्थों का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ देता है। ऐसी स्थिति में हमारी कोशिकाएं दिमाग को तुरंत पानी की जरूरत का संकेत भेजती हैं और हमें तेज प्यास महसूस होती है।

तेल और प्रोसेस्ड सामग्री का पाचन पर असर

बाहर के खाने में अक्सर तेल की मात्रा बहुत ज्यादा रखी जाती है। ज्यादा तला-भुना और मैदे जैसी प्रोसेस्ड सामग्री से बना खाना पचाने के लिए हमारे शरीर को सामान्य से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

पाचन की इस जटिल और लंबी प्रक्रिया के दौरान शरीर को अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि बाहर का भारी खाना खाते ही गला सूखने लगता है और प्यास का स्तर बढ़ जाता है।

भारी प्रोटीन और शरीर की प्रतिक्रिया

सिर्फ तेल-मसाले ही नहीं, बल्कि भारी या अधिक प्रोटीन वाला आहार भी प्यास बढ़ाता है। प्रोटीन को शरीर में तोड़ने और पूरी पाचन प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए मेटाबॉलिज्म को ज्यादा फ्लुइड्स यानी तरल पदार्थों का इस्तेमाल करना पड़ता है।

जब शरीर के भीतर मौजूद पानी इस प्रक्रिया में खर्च होता है, तो उसकी भरपाई के लिए हमें बार-बार पानी पीना पड़ता है।

घर का भोजन और राहत का तरीका

घर में बने खाने में नमक, तेल और मसालों की मात्रा हमेशा नियंत्रित रहती है। इसलिए साधारण रोटी-सब्जी या दाल-चावल शरीर के अंगों पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालते और प्यास भी कम लगती है।

अगर बाहर खाने के बाद बार-बार प्यास लग रही है, तो केवल सादा पानी पीना ही काफी नहीं है। ऐसी स्थिति में छाछ का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। छाछ न केवल शरीर को अंदरूनी ठंडक देती है, बल्कि यह पाचन सुधारने और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में भी मदद करती है।

Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

Leave a Comment