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उत्तराखंड के इस इलाके में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक, 10 स्कूलों में 4 दिन की छुट्टी घोषित

उत्तराखंड के चमोली जिले अंतर्गत नारायणबगड़ क्षेत्र में पागल और आवारा कुत्तों के लगातार बढ़ते हमलों के बाद प्रशासन ने 10 स्कूलों में 20 से 23 अगस्त 2026 तक चार दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस अवधि में ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाएगी और वन विभाग, आपदा प्रबंधन तथा पशुपालन विभाग की संयुक्त टीमें कुत्तों को नियंत्रित करने में जुटी हैं।

Stray Dog Attack In Chamoli Narayanbagar, 10 Schools Shut For 4 Days

HIGHLIGHTS

  • नारायणबगड़ के 10 स्कूलों में 20-23 अगस्त 2026 तक अवकाश
  • अवकाश के दौरान प्रभावित स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होंगी
  • वन, आपदा प्रबंधन और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम तैनात
  • पागल कुत्ते के हमले से कई लोग और छात्र घायल

दून हॉराइज़न, गोपेश्वर (20 अगस्त 2026): उत्तराखंड के चमोली जिले के नारायणबगड़ विकासखंड में आवारा और आक्रामक कुत्तों के बढ़ते हमलों को देखते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने सड़क किनारे स्थित 10 विद्यालयों में 20 अगस्त से 23 अगस्त 2026 तक चार दिवसीय अवकाश घोषित करने का आधिकारिक आदेश जारी किया है।

बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर जिलाधिकारी गौरव कुमार के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। अवकाश के दौरान इन सभी 10 शिक्षण संस्थानों में छात्रों के लिए ऑनलाइन माध्यम से कक्षाएं संचालित की जाएंगी ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।

नारायणबगड़ क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से पागल और लावारिस कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा था। बाजार क्षेत्र में मंगलवार को एक पागल कुत्ते ने राह चलते पांच लोगों को बुरी तरह नोच लिया था। उस कुत्ते ने रास्ते में मिलने वाले अन्य लावारिस कुत्तों और मवेशियों पर भी जानलेवा हमले किए, जिससे क्षेत्र के अन्य जानवरों में भी रेबीज संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

बुधवार को उत्तरांचल विद्या निकेतन स्कूल जा रहे दो मासूम छात्रों पर आवारा कुत्ते ने झपट्टा मारकर उन्हें लहूलुहान कर दिया। उत्तरांचल विद्या निकेतन के प्रधानाचार्य डीएस रावत ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि घायल छात्रों को तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और साथ ही स्थानीय पुलिस प्रशासन को मामले की लिखित सूचना दी गई।

ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी को तत्काल ज्ञापन सौंपा था। गणेश चंदोला ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि नारायणबगड़ मुख्य बाजार और संपर्क मार्गों पर आक्रामक कुत्तों के झुंड के कारण स्कूली बच्चों और पैदल चलने वाले ग्रामीणों की जान सीधे जोखिम में है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा घेरा बनाने और क्षेत्र को आतंकमुक्त कराने की सख्त मांग उठाई थी।

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मुख्य शिक्षा अधिकारी के प्रस्ताव पर त्वरित संज्ञान लेते हुए स्कूल बंद रखने की स्वीकृति दी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी और उप शिक्षा अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे क्षेत्र के निर्धारित 10 स्कूलों में इस अवकाश और ऑनलाइन कक्षाओं का कड़ाई से अनुपालन कराएं।

प्रशासन के आदेश के तहत जिन 10 विद्यालयों को 23 अगस्त 2026 तक बंद रखा गया है, उनमें राजकीय इंटर कॉलेज नारायणबगड़, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज नारायणबगड़, सरस्वती शिशु मंदिर नारायणबगड़, उत्तरांचल विद्या निकेतन, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारायणबगड़, श्री गुरु रामराय पब्लिक स्कूल पंती, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नलगांव, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नलगांव, मॉडर्न चिल्ड्रंस एकेडमी और उत्तराखंड विद्यालय निकेतन शामिल हैं।

सड़कों पर कुत्तों की हिंसक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक असाधारण रूप से बड़ा संयुक्त राहत दल मैदान में उतारा गया है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में वन विभाग, आपदा प्रबंधन और पशुपालन विभाग के कर्मचारियों की कई टीमें एक साथ जाल और उपकरणों के साथ नारायणबगड़ और आसपास के मींग गधेरा क्षेत्र में तैनात की गई हैं। संयुक्त टीम ने बुधवार से अब तक कई संदिग्ध कुत्तों को पकड़ा है और पशु चिकित्सकों की देखरेख में उनका परीक्षण व उपचार शुरू किया है।

पशुपालन विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्थिति पर अपनी रिपोर्ट देते हुए बताया है कि वर्तमान समय कुत्तों का मेटिंग सीजन है। इस प्राकृतिक अवधि के दौरान सामान्य दिनों के मुकाबले कुत्तों का व्यवहार अत्यधिक संवेदनशील, चिड़चिड़ा और हिंसक हो जाता है। झुंड बनाकर चलने वाले ये श्वान किसी भी हलचल पर तत्काल हमलावर हो रहे हैं।

स्थानीय बाजार में दहशत का आलम यह है कि आम नागरिक और व्यापारी अपनी दुकानों और हाथों में मोटे लाठी-डंडे लेकर बाहर निकल रहे हैं। अत्यधिक आक्रोश के बीच ग्रामीणों द्वारा दो हिंसक कुत्तों को पीट-पीटकर मार देने की सूचना भी सामने आई है। मींग गधेरा और नलगांव के आसपास के रास्तों पर आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और अभिभावक अपने बच्चों को घरों से बाहर निकालने से बच रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवारा श्वानों के नियंत्रण, नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम संचालन का दायित्व पूरी तरह स्थानीय नगर निकायों पर निर्भर करता है। पहाड़ी जिलों के अधिकांश ग्रामीण और अर्ध-शहरी निकायों में इस तरह की नसबंदी और डॉग-पाउंड की कोई ठोस आधारभूत व्यवस्था अभी तक धरातल पर क्रियान्वित नहीं हो सकी है, जिससे ऐसे क्षेत्रों में समस्या लगातार विकराल रूप ले रही है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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