ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

Ankita Bhandari Case : पूर्व विधायक सुरेश राठौर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मिली अग्रिम जमानत

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी विवाद में पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने राज्य सरकार को इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर अपनी आपत्ति दाखिल करने का निर्देश दिया है।

Ankita Bhandari Case : पूर्व विधायक सुरेश राठौर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मिली अग्रिम जमानत

HIGHLIGHTS

  • पूर्व विधायक सुरेश राठौर को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली।
  • न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने दिया आदेश।
  • राज्य सरकार को आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह मिले।
  • देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज है यह मुकदमा।

नैनीताल, 09 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Ankita Bhandari Case : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने इस मामले की विस्तार से सुनवाई की। अदालत ने पूर्व विधायक को राहत देते हुए राज्य सरकार को तीन सप्ताह में अपनी आपत्ति पेश करने का आदेश दिया है।

यह पूरा विवाद अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक कथित वीआईपी के नाम पर आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो प्रसारित करने का है। शिकायतकर्ता आरती गौड़ और भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर यह सामग्री डालकर उनकी छवि को बुरी तरह धूमिल किया गया है।

देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में आरती गौड़ की तरफ से पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज कराया गया था। सुरेश राठौर के वकील ने अदालत में दलील दी कि पुलिस द्वारा सुप्रीम कोर्ट के तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्हें इस मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की पूरी आशंका बनी हुई थी।

सुरेश राठौर के खिलाफ हरिद्वार में भी दो मुकदमे दर्ज हुए थे, जिन्हें हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका है। आरती गौड़ और दुष्यंत कुमार गौतम द्वारा देहरादून में दर्ज कराए गए मामलों में फिलहाल पुलिस की गहन जांच चल रही है। इसी जांच के बीच पूर्व विधायक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सीधे हाईकोर्ट का रुख किया था।

हाईकोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई में बेहद सख्त टिप्पणी की थी। अदालत का कहना था कि किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया के जरिए इतने गंभीर अपराध से जोड़कर उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना बेहद गंभीर प्रकृति का मामला है।

न्यायाधीश ने साफ कहा था कि अगर किसी व्यक्ति के पास इस मामले से जुड़े कोई भी साक्ष्य मौजूद हैं, तो उसे सक्षम प्राधिकारी के सामने पेश किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी की छवि खराब करने या किसी राजनीतिक साजिश को रचने के लिए कतई नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसियों को इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करनी चाहिए।

Advertisement

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Leave a Comment